देहरादून, उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कलेक्ट्रेट परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पौधे लगाए तथा जनपदवासियों से अधिकाधिक पौधारोपण करने और लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी डॉ. चौहान ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के प्रति हमारी आस्था, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी का प्रतीक है। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति सदैव प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देती रही है और हरेला पर्व इसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी की अमूल्य धरोहर हैं। स्वच्छ वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह पौधारोपण को केवल औपचारिकता न मानकर जन-आंदोलन का रूप दे।
जिलाधिकारी ने कहा कि पौधारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब लगाए गए पौधों का नियमित संरक्षण और संवर्धन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से अपने जीवन में कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यही प्रयास आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि हरेला पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और हरित संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी जनपदवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण, पौधों के संवर्धन और हरित वातावरण के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।









