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ई-वेस्ट से निपटने के लिए रीसाइक्लिंग है जरूरी

By: prabhatchingari

On: Saturday, February 22, 2025 8:37 PM

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देहरादून, विशेषज्ञों ने ई-वेस्ट की समस्या से निपटने के लिए गैजेट्स की रीसाइकलिंग के सुझाव पर जोर दिया।
ग्राफिक एरा के के. पी. नौटियाल ऑडिटोरियम में ई-वेस्ट जागरूकता सम्मेलन में विशेषज्ञों ने अर्बन माईनिंग, केवल आवश्यक उपकरण खरीदने, उनका रखरखाव और पुराने उपकरणों को रीसाइकलिंग सेंटर भेजने के भी सुझाव दिए। सम्मेलन को उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र की निदेशक डॉ. अनीता रावत ने संबोधित करते हुए कहा कि ई-वेस्ट की समस्या से निदान के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का साथ मिलकर कार्य करना आवश्यक है। पारंपरिक, नई शिक्षा व विकास का तालमेल ऐसी तकनीकें बनाने में मददगार साबित होगा जो न केवल ई-वेस्ट को कम करेंगी बल्कि सस्टेनेबल भी होगीं। उन्होंने कहा कि लोगों को सस्टेनेबिलिटी के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। इसमें अनुसंधान, शिक्षा व नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रो- वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ ने कहा कि लोग सुबह टूथब्रश करने से लेकर रात में सोने तक कई तरह के उपकरणों का उपयोग करते हैं। स्वास्थ्य मॉनिटर करने वाले उपकरण स्वास्थ्य सुधारने में तो मददगार साबित होते हैं लेकिन ई-वेस्ट भी उत्पन्न करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आवश्यक है कि लोग खुद जिम्मेदार बनकर कम से कम ई-वेस्ट पैदा करें। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण इंजीनियर डा. अंकुर कंसल ने राज्य में ई-वेस्ट की समस्या को हल करने के लिए जारी की गई नीतियों, प्रयासों और समाधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सम्मेलन में अटैरो रीसाइकलिंग के वाइस प्रेसिडेंट-सोर्सिंग पवनदीप सिंह बावा, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के चीफ इंजीनियर भारतेंदु विमल व ईको ग्रुप सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष आशीष गर्ग ने ई-वेस्ट समस्या से जुड़ी चुनौतियों व समाधानों पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि ई-वेस्ट को यू ही फेंक देने से डेटा, गोपनीय सूचनाएं व बैंक एकाउंट जैसी जानकारी लीक होने का खतरा होता है।
सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्मेंट आफ मैनेजमेंट स्टडीज व ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट ने ईको ग्रुप सोसायटी के साथ मिलकर किया। सम्मेलन में एचओडी डॉ. नवनीत रावत, डॉ. गिरीश लखेड़ा, डॉ. सचिन घई, संयोजक डॉ. नीरज शर्मा, डा. नागेन्द्र शर्मा, कैप्टन राजश्री थापा, ईको ग्रुप सोसायटी के अनिल कुमार मेहता, संजय भार्गव, शिक्षक- शिक्षिकाएं व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन सोनाली दानिया ने किया।

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