देहरादून, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समयबद्ध राहत एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई।
जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15 मामलों में 16.52 लाख रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की गई। इनमें जातिसूचक शब्दों एवं गाली-गलौज के 10, छेड़छाड़ का एक, बलात्कार का एक, हत्या के दो तथा अन्य श्रेणी का एक मामला शामिल है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक पांच मामलों में 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी है, जिनमें चार मामले जातिसूचक शब्दों एवं गाली-गलौज तथा एक अन्य श्रेणी का है।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में पांच स्वीकृत मामलों में बजट उपलब्ध न होने से सहायता राशि का भुगतान लंबित है। चार मामलों में स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है, जबकि एक मामला अभिलेखों के सत्यापन और एक अन्य बैंक खाते का विवरण उपलब्ध न होने के कारण लंबित है। दो मामलों में विधिक राय प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने सभी उपखंडों में उपखंड स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समितियों के गठन एवं नियमित बैठकें सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऋषिकेश और डोईवाला उपखंडों में सात दिनों के भीतर समितियों का गठन कर बैठक आयोजित करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि मसूरी, विकासनगर, देहरादून सदर तथा कालसी उपखंडों में समितियों का गठन हो चुका है तथा मसूरी और विकासनगर में 17 जुलाई को बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
सीडीओ ने कहा कि उपखंड स्तरीय समितियां अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों की रोकथाम, पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने, विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा अधिनियम के प्रभावी अनुपालन की नियमित समीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
बैठक में पुलिस क्षेत्राधिकारी संतोष कुंवर, जनप्रतिनिधि गोपाल पुरी, मनोज शर्मा, गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि लॉरेंस सिंह, लता चमोली, निरुपमा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य मौजूद रहे।









