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पितृपक्ष 2025 : ग्रहणों की छाया में श्राद्ध पक्ष, 122 वर्षों बाद अनोखा योग

By: Naveen Joshi

On: Sunday, September 7, 2025 11:39 AM

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देहरादून,
सनातन परंपरा के महत्त्वपूर्ण कालखंड पितृपक्ष का इस बार आरंभ और समापन अद्भुत संयोग के साथ होने जा रहा है। 122 वर्षों बाद पहली बार पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से और समापन सूर्यग्रहण पर होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और विशेष फलदायी माना जा रहा है।

चंद्रग्रहण आज 
पितृपक्ष का आरंभ आज हो रहा है। इसी रात को चंद्रग्रहण लगेगा, जो रात 8:58 बजे से 2:25 बजे (8 सितम्बर) तक दिखाई देगा। ग्रहण का मध्य समय रात 11:11 बजे रहेगा। यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि पर होगा तथा एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया सहित भारत से पूर्ण रूप से दिखाई देगा।

पूर्णिमा श्राद्ध और ग्रहण का प्रभाव
7 सितम्बर को ही भाद्रपद पूर्णिमा का पहला श्राद्ध भी है। परंपरा के अनुसार श्राद्धकर्म दिन में ग्रहण से पूर्व सम्पन्न करना श्रेयस्कर रहेगा। जो लोग समयानुसार यह न कर पाएं, वे रात 2:25 बजे ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान और तर्पण कर सकते हैं।

सूतक काल
चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सुबह 11:58 बजे से सूतक प्रारंभ होकर रात 2:25 बजे तक चलेगा। इस दौरान भोजन पकाना-करना, जल ग्रहण करना और शुभ कार्य वर्जित हैं। केवल बालक, रोगी और वृद्ध को आवश्यकता अनुसार भोजन की अनुमति है।

ग्रहण काल की धार्मिक मान्यताएँ
ग्रहण काल में जप, ध्यान और पाठ को विशेष फलदायी माना गया है। भोजन की शुद्धि हेतु परंपरा है कि पहले से बने भोजन में तुलसी पत्र या कुश रख दिया जाए। ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान, गंगाजल से शुद्धिकरण, दान-पुण्य और श्राद्धकर्म विशेष पुण्य प्रदान करते हैं।

सूर्यग्रहण 21 सितम्बर को
पितृपक्ष का समापन 21 सितम्बर 2025, रविवार को होगा और उसी दिन सूर्यग्रहण भी लगेगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि सूर्यग्रहण का पितृकर्म पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, किंतु वैश्विक परिस्थितियों में परिवर्तन संभावित है। भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति मजबूत बने रहने के योग बताए जा रहे हैं।

क्या खास है इस बार

  • 122 वर्षों बाद अद्भुत संयोग : पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से और समापन सूर्यग्रहण पर
  • 7 सितम्बर : चंद्रग्रहण (8:58 रात्रि से 2:25 प्रातः तक)
  • 7 सितम्बर सुबह 11:58 बजे से सूतक काल
  • भाद्रपद पूर्णिमा का पहला श्राद्ध : दोपहर तक या ग्रहण मोक्ष के बाद
  • 21 सितम्बर को सूर्यग्रहण के साथ पितृपक्ष का समापन

ग्रहण के दौरान सावधानियाँ

  • गर्भवती महिलाएँ ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें।
  • ग्रहण काल में भोजन पकाना वर्जित है, पहले से भोजन तैयार कर लें।
  • बच्चों व रोगियों को आवश्यकता अनुसार भोजन दिया जा सकता है।
  • ग्रहण काल में धार्मिक पाठ, जप और ध्यान करें।
  • ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान करें और घर को पवित्र जल से शुद्ध करें।
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Naveen Joshi

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