देहरादून, उत्तराखंड में खेल शिक्षा और खेल प्रतिभाओं के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य के पहले खेल विश्वविद्यालय का प्रथम शैक्षणिक सत्र आगामी 29 अगस्त, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विधिवत प्रारंभ होगा। विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 122 पदों के सृजन को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने इसकी घोषणा करते हुए इसे प्रदेश के खेल इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
खेल मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार और देव पूजन के साथ विश्वविद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन के लिए कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 122 पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीधी भर्ती की जाएगी, जिसके लिए शीघ्र ही आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा खेल शिक्षा और खेल प्रबंधन के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं का विस्तार होगा। इससे उत्तराखंड में खेलों से जुड़े विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और अन्य पेशेवरों को भी बेहतर मंच उपलब्ध होगा।
रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड का पहला खेल विश्वविद्यालय राज्य की खेल संस्कृति को नई पहचान देने के साथ-साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, अनुसंधान और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित शिक्षा के माध्यम से प्रदेश के खिलाड़ियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विशेष रूप से पर्वतीय और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को इस विश्वविद्यालय से नई दिशा मिलेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि उत्तराखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य और देश का गौरव बढ़ा सकें।
खेल मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल अवसंरचना के विकास, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और खेलों को करियर के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।









