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साधना व समाज सेवा के प्रतीक आचार्य श्री का महोत्सव, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

By: Naveen Joshi

On: Thursday, September 18, 2025 10:14 PM

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देहरादून, 31वीं पुष्प वर्षा योग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में “अतीत की स्मृति – वर्तमान का उत्सव” कार्यक्रम के अंतर्गत आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का 31वां दीक्षा स्मृति महोत्सव आज भव्यता के साथ प्रारंभ हुआ। सुबह ग्रैंड यूफोरिया, कारगी चौक तक आचार्य श्री के पावन सान्निध्य में विशाल घटयात्रा निकाली गई। यह यात्रा श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, माजरा से प्रारंभ हुई, जिसमें महिलाओं ने कलशों के साथ भागीदारी निभाई। बैंड-बाजों और भक्तिमय गीतों के बीच निकली यात्रा ने पूरे मार्ग को धर्ममय बना दिया।इसके उपरांत ध्वजारोहण, पंडाल उद्घाटन, श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा एवं जिनेन्द्र महाअर्चना का आयोजन किया गया। प्रथम कलश अभिषेक का सौभाग्य पारस जैन, अमित जैन, आर्जव जैन, विनोद जैन, राजीव जैन एवं दिनेश जैन को प्राप्त हुआ। शाम को गुरु भक्ति एवं महाआरती का आयोजन हुआ। विशेष आकर्षण “महिला मंच देहरादून” द्वारा प्रस्तुत नाटिका रही, जिसमें आचार्य श्री के जन्म (22 अक्टूबर 1970, जशपुर नगर, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़), दीक्षा (8 अप्रैल 1983, 12.5 वर्ष की आयु में, आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में) से लेकर अब तक के तप, साधना एवं समाजोपयोगी कार्यों का जीवंत चित्रण किया गया।

 

आचार्य श्री के प्रमुख योगदानों में व्यसन मुक्ति अभियान : प्रवचनों के माध्यम से 1600+ कैदी व्यसनमुक्त हो चुके। जीवन आशा अस्पताल, गाज़ियाबाद : विकलांगों के लिए विशेष सेवा संस्थान। सौरभांचल तीर्थ क्षेत्र, गन्नौर (हरियाणा) : आचार्य श्री के मार्गदर्शन में निर्मित भव्य तीर्थ। सौरभ सागर सेवा संस्थान : शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाज सेवा में सक्रिय। पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं : 60 से अधिक प्रतिष्ठा महोत्सवों का सफल आयोजन।आचार्य श्री को समाज में “संस्कार प्रणेता” के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। उनके 29 वर्षों से अधिक तप, त्याग और साधना से युक्त जीवन समाज सुधार का प्रेरक उदाहरण है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु एवं दूर-दूर से आए भक्तगण शामिल हुए और धर्मलाभ प्राप्त किया।

 

 

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