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लोक अदालत में हजारों मामलों का आपसी सहमति से निपटारा

By: Naveen Joshi

On: Saturday, May 9, 2026 7:15 PM

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एक दिन में 9080 से अधिक मामलों का निस्तारण, राष्ट्रीय लोक अदालत में करोड़ों की धनराशि पर हुआ समझौता

देहरादून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शुक्रवार को वर्ष 2026 की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद देहरादून सहित बाह्य न्यायालय ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी एवं चकराता में किया गया। प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल, पारिवारिक, चैक बाउंस, शमनीय आपराधिक मामलों सहित विभिन्न वादों की सुनवाई की गई। जनपद देहरादून में कुल 5844 मामलों का निस्तारण करते हुए 13 करोड़ 36 लाख 35 हजार 816 रुपये की धनराशि पर समझौता कराया गया।

लोक अदालत में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 251 मामले, चैक बाउंस के 515 मामले, धन वसूली के 17 मामले, मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के 14 मामले, पारिवारिक विवाद के 105 मामले, पब्लिक यूटिलिटी सर्विस के 26 मामले, मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत 4835 मामले, उपभोक्ता फोरम के 12 मामले, आर्बिट्रेशन के 9 मामले तथा अन्य सिविल व समझौतायोग्य मामलों का निस्तारण किया गया।

वहीं बाह्य न्यायालय विकासनगर में 978 मामलों का निस्तारण कर 22 लाख 67 हजार 653 रुपये, ऋषिकेश में 537 मामलों में 2 करोड़ 31 लाख 40 हजार 51 रुपये, डोईवाला में 242 मामलों में 22 लाख 80 हजार रुपये तथा मसूरी में 56 मामलों में 47 लाख 55 हजार 492 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ।

इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंकों एवं संस्थानों के प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों का भी निस्तारण किया गया। प्री-लिटिगेशन स्तर पर कुल 3236 मामलों का सफल निस्तारण करते हुए 2 करोड़ 18 लाख 40 हजार 185 रुपये की धनराशि पर समझौता कराया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज सीमा डुंगराकोटी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालतें न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति, सौहार्द और संवाद की भावना को बढ़ावा मिलता है, जिससे समाज में शांति और सामंजस्य का वातावरण बनता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है तथा यहां पारित निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं। साथ ही पक्षकारों को जमा न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है।

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