देहरादून, । यूपीईएस के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसओएचएसटी) की ओर से आयोजित तीन दिवसीय वर्ल्ड कांग्रेस ऑन हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (डब्ल्यूसीएचएसटी) 2026 मंगलवार को संपन्न हो गई। ‘रिसर्च और इनोवेशन के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव’ थीम पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में 500 से अधिक शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए शोध, आधुनिक तकनीक और बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कांग्रेस का आयोजन एसओएचएसटी की डीन डॉ. पद्मा वेंकट और आयोजन सचिव एवं प्रोफेसर डॉ. निधि चौहान के नेतृत्व में किया गया। इसमें आयुष मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और एम्स सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएसईआर, एमिटी यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो सहित देश-विदेश के शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
समापन अवसर पर एसओएचएसटी की डीन डॉ. पद्मा वेंकट ने कहा कि भारत के स्वास्थ्य सेवा और शोध तंत्र को मजबूत करने के लिए शोधकर्ताओं की नई पीढ़ी को तैयार करना, उनकी क्षमताओं का विकास करना और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। ऐसे आयोजन वैज्ञानिक ज्ञान और नवाचार को जनहित में उपयोगी समाधानों में बदलने का अवसर प्रदान करते हैं।
यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य चिकित्सा विज्ञान, उभरती तकनीकों और बहुविषयक शोध के समन्वय में है। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ें और भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम पेशेवर तैयार करें।
सम्मेलन के दूसरे दिन आयुष क्षेत्र के राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन ने भारतीय ज्ञान परंपरा और जैव-चिकित्सा नवाचार पर व्याख्यान दिया। सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूरु के निदेशक प्रो. पी. गिरिधर ने खाद्य प्रसंस्करण और पोषण संवर्धन के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्रो. सुरेश मित्तल ने आधुनिक दौर में टीकों की उपलब्धियों, चुनौतियों और उनसे जुड़ी भ्रांतियों पर विचार रखे।
दवा अनुसंधान से लेकर व्यावसायीकरण तक की चुनौतियों पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक खोजों को प्रभावी स्वास्थ्य समाधानों में बदलने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘सिनेप्स’ मंच पर स्नातक और परास्नातक छात्रों ने अपने शोध कार्यों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नवाचारों का प्रदर्शन किया। मंच पर दस उत्कृष्ट छात्र नवाचारों और शोध परियोजनाओं को सम्मानित भी किया गया।
सम्मेलन के तीसरे दिन पूर्व आईसीएमआर महानिदेशक पद्म भूषण प्रो. एन.के. गांगुली ने माइक्रोबायोम विज्ञान, स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित दृष्टिकोणों पर व्याख्यान दिया। इसरो के पूर्व विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. पी.जी. दिवाकर ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के उपयोग पर जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त, मानव स्वास्थ्य के भविष्य, विज्ञान, तकनीक, नैतिकता और स्वास्थ्य नीतियों से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। चर्चा में डिजिटल हेल्थ, स्वास्थ्य नवाचार और जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
कांग्रेस का समापन पुरस्कार समारोह के साथ हुआ। इसमें शोध, नवाचार और वैज्ञानिक संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति, इनोवेशन शोकेस, इंडस्ट्री एक्सीलेंस और प्रोडक्ट इनोवेशन पुरस्कार प्रदान किए गए।
आयोजकों के अनुसार, डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 ने शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों के लिए नए और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर प्रदान किया।
यूपीईएस की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विज्ञान कांग्रेस संपन्न, 500 से अधिक विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
By: Naveen Joshi
On: Tuesday, October 13, 2026 6:00 PM













