चमोली। (प्रदीप लखेड़ा) हिमालय की दिव्य वादियों में स्थित चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर भगवान रुद्रनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। भक्तिमय माहौल के बीच मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
शनिवार को मंदिर में भगवान रुद्रनाथ का विधिवत अभिषेक और श्रृंगार किया गया। पंडित आचार्य हरीश भट्ट ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान मंदिर में रुद्री पाठ का आयोजन भी किया गया। शाम पांच बजे से कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। निर्धारित धार्मिक परंपराओं और विधि-विधानों के अनुसार सभी अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इसके बाद रात करीब आठ बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
कपाट बंद होने के साथ ही भगवान रुद्रनाथ की डोली की शीतकालीन यात्रा भी शुरू होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 18 अक्टूबर को भगवान की डोली ज्वाला मंदिर, देवलधार में रात्रि प्रवास करेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को डोली गोपेश्वर स्थित भगवान के शीतकालीन गद्दीस्थल श्री गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।
शीतकाल के दौरान आगामी छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर में संपन्न होगी। इस तरह शीतकाल के लिए कपाट बंद होने के बाद भी श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना शीतकालीन गद्दीस्थल पर कर सकेंगे।













