देहरादून, विशेषज्ञों ने कम्प्यूटेशनल तकनीक को प्रभावित करने वाले पदार्थों का चयन सावधानीपूर्वक करने पर जोर दिया।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटेशनल तकनीक पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को आज जीएसटी, उत्तराखण्ड के ज्वांइट कमीशनर निशिकांत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग, डेटा एनेलिटिक्स, स्मार्ट व नैनो तकनीक कम्प्यूटेशनल तकनीक में उपयोग होने वाले पदार्थों की बारीकियों को समझने और हल्की, मजबूत व कुशल तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। ये पदार्थ सस्टेंनेबेल होते हैं। उन्होंने कम्प्यूटेशनल तकनीक क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग देने और जागरूक करने को आवश्यक बताया।
नेशनल चिन-यी यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलाॅजी, ताइवान के प्रतीक नेगी ने सम्मेलन को आनलाइन माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि फेज चेन्ज मैटिरियल इंजीनियरिंग क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ये पदार्थ पिघनले व जमने की प्रक्रिया के दौरान गर्मी सोखने व वितरित करने की क्षमता रखते हैं। इनका उपयोग थर्मल इन्सूलेशन, कूलिंग तकनीक और संरचनाओं के निर्माण में भी किया जा रहा है। आॅल इण्डिया काउंसिल फाॅर टेक्निकल एजुकेशन के आईटी एण्ड टेक्नोलाॅजी ट्रांसफर मैनेजर मदन मोहन शरण सिंह ने नई तकनीकों के व्यवसायीकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लाईसेंसिंग, नान डिसक्लोजर एग्रीमेण्ट व तमाम समझौतों से सम्बन्धित कानूनों व विनियमों को जांच परख कर ही तकनीकी उत्पाद के खोजकर्ता बौद्धिक सम्पत्ति के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे।
कुलपति डा. नरपिन्दर सिंह ने कहा कि तकनीकी विकास और उत्पादन लोगों की जरूरतों के मद्देनजर होना चाहिए। इसके लिए छात्र-छात्राओं को तकनीकी क्षेत्र की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए आगे आकर योगदान देना होगा। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आज 100 शोधपत्र और 200 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन का आयोजन डिपार्टमेण्ट आॅफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने किया। सम्मेलन में एचओडी कपिल कुमार शर्मा, आयोजन सचिव डा. बृजेश प्रसाद, डा. नरेन्द्र गड़िया, शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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