
देहरादून, ग्राफिक एरा में स्कूल और उच्च शिक्षा के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर मंथन किया गया। दिल्ली, पुणे, गुरूग्राम, लखनऊ, अलीगढ़, अम्बाला, मेरठ, हरिद्वार, कानपुर, पंजाब, देहरादून सहित नेपाल के विभिन्न स्थानों से आये प्रधानाचायों ने इस पर विचार साझा किए।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में भविष्य को सशक्त बनाने के लिए स्कूलों व विश्वविद्यालयों के सहयोग पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 50 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भाग लेकर शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर गम्भीर मंथन किया। कार्यक्रम में प्रधानाचायों ने स्कूल को आर्टिफिशियल इण्टैलिजेन्स प्रबन्धित साधनों से जोड़ने, स्कूल से ही शोध व परियोजनाओं को बढ़ावा देने, तकनीकी बदलावांे को अपनाने, उद्योग जगत के लिए जरूरी कौशल सिखाने, छात्रों की जरूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रमों का निर्माण करने, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ने और कार्यशालाओं का नियमित रूप से आयोजन करने जैसे सुझाव दिए। कार्यक्रम को आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली में शिक्षक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा के स्तर को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को भी समय के साथ हो रहे बदलावों को अपनाना चाहिए। वे नई तकनीकें सीखकर व शोध कार्यों से जुड़कर स्कूल में बेहतर शैक्षिणिक पर्यावरण को बढ़ावा दे सकेंगे।
उन्होंने कहा कि शैक्षिणिक संस्थानों व स्कूलों के बीच सहयोग आप्शन नहीं बल्कि आज की जरूरत है। अधिकांश बच्चे स्कूल से निकलकर विश्वविद्यालय में आने वाले बदलावों के लिए तैयार नहीं होते हैं। ये बदलाव उनके लिये चुनौतिपूर्ण हो सकते हैं। इन बदलावों का सामना करने के लिए शिक्षकों को स्कूल से ही छात्र-छात्राओं को मानसिक तौर पर तैयार करना चाहिए। उन्हांेने कहा कि ग्राफिक एरा ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन डा. कमल घनशाला आज भी खुद क्लास लेकर देश विदेश के 40 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने का कार्य कर रहे हैं जोकि हर शिक्षक के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं।
कार्यक्रम में कुलपति डा. नरपिन्दर सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए स्कूल और विश्वविद्यालयों का साथ मिलकर कार्य करना आवश्यक है। इससे छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल की चारदिवारी से निकलकर विश्वविद्यालय में जाने की प्रक्रिया सरल होगी। उन्होंने कहा कि तकनीकों में तेजी से होते बदलाव, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संरचनाएं तैयार करना, डिजिटल परिवर्तन, स्वास्थ्य व जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का सामना करने के लिए छात्र-छात्राआंे को तैयार करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। बेहतर परिणामों के लिए विश्वविद्यालय व स्कूल के बीच सम्बन्ध स्थापित करके छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों के लिए भी विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन, कैरियर काउंसिलिंग, संसाधनों व अन्य सुविधाओं का आदान-प्रदान किया जाना चाहिए।
आईएजुकेशनलाईज की संस्थापक अध्यक्ष शिखा गुप्ता ने कहा कि शिक्षक-शिक्षिकाएं अक्सर मेधावी छात्र-छात्राओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। कक्षा में एवरेज प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सबसे ज्यादा मार्गदर्शन व सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे विद्यार्थी अपेक्षा से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राफिक एरा जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग छात्र-छात्राओं व शिक्षकों के साथ ही अभिभावकों के लिए भी बेहतरीन अवसर है।
कार्यक्रम में फ्राम क्लास रूम टू कैरियरः एनहैंसिंग इम्प्लोयबिलिटी थू्र इंटिगे्रटेड पाथवेज और ब्रिजिंग एस्पिरेशन्सः कोलाबोेरेटिव पाथवेज फोर सीमलैस एजुकेशनल ट्रांजिशन्स विषय पर सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में तक्षशिला प्रोगेसिव इंग्लिश स्कूल, झापा नेपाल के एकेडमिक निदेशक डा. विक्टर इग्नेशियस जोसफ, ऋषिकुल वल्र्ड स्कूल दिल्ली की एकेडमिक निदेशक ज्योति लूथरा, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के अमरीश शर्मा, ऐंजल ग्रुप आॅफ स्कूल, पुणे की क्लस्टर प्रिंसीपल खुशबू सिंह, लेबोरेट्री सेकेण्डरी स्कूल काठमाण्डू के प्रिंसिपल डा. लाक्पा शेरपा, ग्राफिक एरा ग्लोबल स्कूल के प्रिंसिपल राज कुमार त्रेहान, दा चांदबाघ स्कूल काठमाण्डू के प्रिंसिपल चंद्रयान प्रधान श्रेष्ठा व दिल्ली पब्लिक स्कूल नेपाल के प्रिंसिपल पी. के. संकरालिंगम ने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और कार्यक्रम में उपस्थित स्कूलों के बीच एक एमओयू किया गया। एमओयू के तहत ग्राफिक एरा स्कूलों में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों व छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करेगा। कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी ने आईएजुकेशनलाईज के सहयोग से किया। कार्यक्रम में डायरेक्टर आईक्यूएसी प्रो. संतोष एस. सर्राफ, डीन इण्टरनेशनल अफेयर्स डा. डी. आर. गंगोडकर, डीन रिसर्च प्रो. भास्कर पंत, कार्यक्रम संयोजक डा. दीपक कौशल, विभिन्न विभागों के एचओडी और प्रधानाचार्य मौजूद रहे। संचालन डा. साक्षी गुप्ता ने किया।
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