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बीमा जागरूकता समिति ने राष्ट्रीय अभियान “सबसे पहले लाइफ़ इंश्योरेंस” के अगले चरण की शुरुआत की

 

देहरादून,  दिसंबर 2023 के एनआईए अध्ययन (i) के अनुसार, भारत एक उल्लेखनीय जीवन बीमा सुरक्षा की कमी से जूझ रहा है। इस कमी का अंतर 2019 में 83% से बढ़कर 2023 में 87% हो गया है। 18 से 35 वर्ष की उम्र के लोगों में 90% से ज़्यादा की यह कमी और भी ज़्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देती है। यह बढ़ती असुरक्षा परिवारों की वित्तीय सुरक्षा (फ़ाइनैंशियल सेक्योरिटी) और उम्मीदों के लिए एक गंभीर खतरा है।

इसकी व्यापक्ता से जुड़ी चुनौती से निपटने के लिए ही भारत में सभी जीवन बीमा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली “बीमा जागरूकता समिति” (इंश्योरेंस अवेयरनेस कमिटी) ने अपने राष्ट्रीय अभियान “सबसे पहले लाइफ़ इंश्योरेंस” के अगले चरण की शुरुआत की है। यह पहल हर भारतीय को एक नए उत्साह के साथ लाइफ़ इंश्योरेंस को अपनी वित्तीय यात्रा की बुनियाद मज़बूत बनाने, बढ़ती जागरूकता को सार्थक कार्रवाई में बदलने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
अपने मूल में, यह अभियान बुनियादी वित्तीय सुरक्षा की उपेक्षा करते हुए बचत और निवेश को प्राथमिकता देने की आम आदत को चुनौती देता है। यह इस पर ज़ोर देता है कि लाइफ़ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) किसी भी सुरक्षित वित्तीय योजना की शुरुआत होनी चाहिए।
भरोसेमंद कहानी सुनाने और भावनात्मक रूप से दिल-दिमाग में बैठने वाले आख्यानों के ज़रिए, यह अभियान रोज़मर्रा के उन पलों में जान फूँक देता है जो सही मायनों में दाँव पर लगे हैं।
उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव लाने और जीवन बीमा समाधानों के बारे में जागरूकता फैलाने और इसकी पहुँच बढ़ाने के लिए इस अभियान की योजना एक साल तक चलने वाली एक नई पहल के रूप में तैयार की गई है।
इंश्योरेंस अवेयरनेस कमिटी (IAC-Life) के एक सदस्य ने कहा, “सबसे पहले तो यह जान लें कि लाइफ़ इंश्योरेंस” सिर्फ़ एक नारा नहीं है, बल्कि यह समय की एक साफ़-साफ़ पुकार है कि हम वित्तीय योजना से कैसे जुड़ते हैं, उसके लिए क्या करते हैं। हम अक्सर धन कमाने की कोशिशों में उसकी सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करते हैं और यह सोचते हैं कि “बाद में देखा जाएगा।” इस अभियान का उद्देश्य इसी मानसिकता को बदलना है। धन कमाने के बाद उसे बचाना भी ज़रूरी होता है।

इस अभियान का उद्देश्य लाइफ़ इंश्योरेंस को “एक ऐसा अच्छा विकल्प होना चाहिए” के बजाय “वित्तीय योजना का सबसे पहला घटक होना चाहिए” के रूप में बदलना है। इस चरण के हिस्से के रूप में, बीमा जागरूकता समिति ने “डिजिटल नॉलेज हब” https://www.sabsepehlelifeinsurance.com/ भी तैयार किया है, जो अभियान के एक प्रमुख घटक के रूप में काम करता है।
यह पहल सुरक्षा की कमियों को कम करने की व्यापक कोशिशों के साथ भी जुड़ती है, जिसमें आईआरडी
एआई का 2024 का आदेश शामिल है और इसमें जीवन बीमाकर्ताओं को 25,000 ग्राम- पंचायतों (ii) में कम से कम 10% ज़िंदगियों को कवर करने की ज़रूरत है।

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