मियाँवाला में तालाब, गौरा देवी पार्क में आधुनिक जलाशय, स्कूलों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग शुरू
देहरादून,
उत्तराखंड सरकार जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा राजधानी क्षेत्र में जल संरक्षण की दिशा में कई नवाचारी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
जल संकट से निपटने और हरियाली को बढ़ावा देने की पहल:
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जानकारी दी कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल जल संकट से निपटना ही नहीं, बल्कि हरियाली और जैव विविधता को संरक्षित करना भी है।
मियाँवाला में बन रहा जल संरक्षण का मॉडल तालाब
राजकीय इंटर कॉलेज, मियाँवाला के पास एक विस्तृत तालाब का निर्माण किया जा रहा है। यह तालाब वर्षा जल का संचयन करेगा और क्षेत्र के भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने में मददगार साबित होगा। इससे स्थानीय किसानों और निवासियों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
गौरा देवी पार्क में अत्याधुनिक जलाशय
गौरा देवी पार्क में आईएसआईएस मॉडल आधारित जलाशय का निर्माण पूर्ण हो चुका है। यह जलाशय पार्क की हरियाली बनाए रखने और वर्षा जल के संरक्षण में सहायक रहेगा। भविष्य में इस स्थान को प्राकृतिक पर्यावरण शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
विद्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
देहरादून के विभिन्न सरकारी स्कूल परिसरों में एमडीडीए द्वारा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इससे न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि छात्रों में पर्यावरणीय जागरूकता भी बढ़ेगी।
वृक्षारोपण और जैव विविधता को बढ़ावा
मियाँवाला तालाब के चारों ओर वृक्षारोपण किया जाएगा जिससे क्षेत्र में हरियाली और स्थानीय जलवायु संतुलन बेहतर होगा। यह जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश: “हर बूँद कीमती है”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
“जल ही जीवन है, और उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में हमें हर बूँद का संरक्षण करना होगा। इस दिशा में कोई भी कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।”
जनसहभागिता बनेगी परिवर्तन की आधारशिला
एमडीडीए उपाध्यक्ष तिवारी ने कहा:
“कोई भी पर्यावरणीय अभियान जनसहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता। हम प्रदेशवासियों से आग्रह करते हैं कि जल और पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में सहभागी बनें।”
