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उत्तराखंडदुर्घटना

खीर गंगा के सैलाब में समाया प्राचीन कल्पकेदार मंदिर

 

तीर्थयात्रियों के आस्था के केंद्र का अस्तित्व संकट में

देहरादून/उत्तरकाशी, धराली क्षेत्र में  खीर गंगा नदी में आए प्रचंड सैलाब ने सैकड़ों वर्षों पुरानी आस्था के प्रतीक प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को गंभीर क्षति पहुंचाई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर का ऊपरी ढांचा सैलाब के तेज बहाव में बह गया, जबकि मंदिर का गर्भगृह जो भूमि से लगभग सात मीटर नीचे स्थित था, मलबे में दब गया है।

ध्यान देने योग्य है कि मंदिर में इन दिनों कल्पकेदार मंदिर समिति द्वारा विस्तारीकरण कार्य चल रहा था। कार्य के दौरान सीढ़ियों के समीप की जा रही खुदाई में प्राचीन तराशी हुई शिलाएं भी प्राप्त हो रही थीं। लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि प्राकृतिक आपदा के एक प्रचंड स्वरूप में यह ऐतिहासिक धरोहर इस प्रकार समा जाएगी।

धराली की पहचान ही कल्पकेदार मंदिर से जुड़ी हुई रही है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर जलमग्न शिवलिंग के रूप में प्रसिद्ध रहा है और चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों का प्रमुख पड़ाव रहा है।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल द्वारा राहत एवं पुनर्स्थापन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। मंदिर समिति और ग्रामीणजन इस अप्रत्याशित क्षति से स्तब्ध हैं और मलबे में दबे गर्भगृह को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटे हैं।

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