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शस्त्र पूजन संग संघ का शताब्दी वर्ष शुभारंभ, 4500 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल

 

 

देहरादून,  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ विजयदशमी और नवरात्रों के पावन अवसर पर नगर के दोनों महानगरों में भव्य रूप से हुआ। महानगर दक्षिण में 23 तथा उत्तर में 18 स्थानों पर पूर्ण गणेश कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्वयंसेवकों ने योग, व्यायाम और अनुशासन का अनुकरणीय प्रदर्शन किया। मातृशक्ति, युवा वर्ग और नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी ने इन कार्यक्रमों को जन-उत्सव का रूप प्रदान किया। वक्ताओं ने विजयदशमी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व केवल भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय का स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। उन्होंने  पूजनीय सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार  की दूरदृष्टि को स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने अनुभव किया कि हिंदू समाज जाति, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव में बंटकर दुर्बल हो रहा है। ऐसे समय में संघ की स्थापना कर समाज को संगठन शक्ति और आत्मस्वाभिमान से जोड़ा गया। यही 100 वर्षों की अखंड यात्रा आज एक यशस्वी और प्रेरणादायी गाथा बन चुकी है। शस्त्र पूजन और शक्ति उपासना की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि संगठित समाज ही अधर्म, अन्याय और अराजकता फैलाने वाली शक्तियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। नवरात्रों की शक्ति उपासना और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की कथा हमें यह विश्वास दिलाती है कि आत्मबल और संगठन से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। वक्ताओं ने संघ की स्थापना, हिंदू समाज की संगठन शक्ति, सेवा, अनुशासन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष बल दिया। साथ ही, समाज को धर्मांतरण और विघटनकारी षड्यंत्रों से सावधान रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उपेक्षित और वंचित वर्गों की सेवा ही सच्चे राष्ट्रधर्म का पालन है। इस अवसर पर चीन युद्ध के वीर सपूत जसवंत सिंह रावत के बलिदान और शहीद भगत सिंह की जयंती का स्मरण करते हुए उनके त्याग और राष्ट्रभक्ति को अनुकरणीय बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलकर ही भारत माता को विश्वगुरु और शांति का प्रतीक बनाया जा सकता है। संघ द्वारा समय-समय पर युद्धकाल, आपदाओं और दुर्घटनाओं में किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख कर कहा गया कि यह संस्कार शाखा और संगठन से ही प्राप्त होता है। शताब्दी वर्ष के इस आरंभिक आयोजन में स्वयंसेवकों का उत्साह और समाज की व्यापक भागीदारी ने यह संदेश दिया कि हिंदू समाज अपनी परंपरा, संस्कृति और संगठन शक्ति के बल पर भारत को सशक्त और विश्वगुरु बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रांत प्रचार प्रमुख  संजय , विभाग प्रचारक  धनंजय ,  राजेंद्र पंत,  अरुण ,  गजेंद्र ,  देवराज  सतेंद्र  सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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