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किताबें पढ़ने की आदत को बढ़ावा दें: ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’—मुख्यमंत्री धामी

By: Naveen Joshi

On: Saturday, November 22, 2025 1:05 PM

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स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को सरकार की प्राथमिकता—गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी के डिजिटलाइजेशन पर फोकस

 

देहरादून। मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जय सिंह रावत की पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” का विमोचन किया। राज्य गठन के बाद की 25 वर्षों की राजनीतिक यात्रा पर आधारित यह पुस्तक उत्तराखंड के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं क्रमिक विकास का प्रामाणिक दस्तावेज़ मानी जा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने लेखक जय सिंह रावत को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य के ढाई दशक के राजनीतिक इतिहास को तथ्य, दस्तावेज़ों और विश्लेषण के आधार पर संग्रहित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे लेखक ने गंभीरता व निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी।

 

सीएम धामी ने कहा कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने राजनीतिक अस्थिरता के कई चरण देखे हैं, जिनका प्रभाव विकास की गति पर पड़ा। रावत द्वारा तैयार यह दस्तावेज़ी संकलन इस पूरे कालखंड को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि “इतिहास लेखन में तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का होना अत्यंत आवश्यक है। रावत जी ने पत्रकारिता की निष्ठा के साथ इसे संजोया है।”

 

बुके नहीं, बुक दीजिए” — मुख्यमंत्री का आह्वान

 

पुस्तकों के अध्ययन के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटरनेट व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी किताबों की उपयोगिता कभी कम नहीं होगी।

“AI कितनी भी उन्नत हो जाए, पुस्तकें मनुष्य के चिंतन और सीखने की प्रक्रिया का विकल्प नहीं बन सकतीं।”

 

उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि किसी भी कार्यक्रम में “बुके नहीं, बुक देने” की परंपरा को बढ़ावा दिया जाए, जिससे पढ़ने की संस्कृति मजबूत होगी और लेखकों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

 

स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर

 

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान की नींव हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय भाषाओं के डिजिटलाइजेशन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, गीत-संग्रह, शोध कार्य तथा विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे साहित्यिक योगदान को प्रोत्साहित करने की दिशा में नई पहलें शुरू कर रही है।

 

सीएम धामी ने विद्यार्थियों और युवाओं से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों और समुदायों में मातृभाषा के उपयोग को बढ़ाएँ और साहित्य व लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में भूमिका निभाएँ।

 

 

“भाषा, संस्कृति और परंपराएँ केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान की आत्मा हैं। इन्हें संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

 

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल माध्यमों पर स्थानीय भाषाओं की सामग्री उपलब्ध होने से इन्हें नई शक्ति मिलेगी और युवा पीढ़ी आसानी से अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी।

 

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला, अनेक पत्रकार, साहित्यकार एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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