देहरादून, धर्मनगरी लाखामंडल में सनातन सेवा समिति लाखामंडल के तत्वावधान में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में महामण्डलेश्वर रुपेंद्र प्रकाश महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
सम्मेलन के दौरान प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने हिंदू परंपराओं और संयुक्त परिवार प्रणाली की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदू संस्कृति और पारिवारिक एकता समाज की मूल शक्ति हैं, जिनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कार्यक्रम में जौनसार-बावर के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार अज्जू तोमर, अत्तर शाह और रेशमा शाह ने पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक कलाओं की इन प्रस्तुतियों से सम्मेलन की भव्यता और गरिमा और भी बढ़ गई।
संयुक्त परिवारों और कारीगरों का सम्मान
सम्मेलन में उन संयुक्त परिवारों को सम्मानित किया गया, जो पीढ़ियों से एक साथ रहते हुए प्रेम, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए हैं। सम्मानित परिवारों में धरतोड़ा (म्यूंडा), सिसरामाण (रविवार, भटाड), भराईक (कांडोई), हंसनाण (कुना), गोगराण (मोटी), रमोला (कांडी), भक्ताण (कांडी), खवाउड़ा (लाउडी), रूपाण (धरतोड़ा), धनाण (नाडा) तथा साज्याण (भटाड) शामिल रहे।
इसके साथ ही समाज के विभिन्न पारंपरिक कारीगरों को भी सम्मानित किया गया। वाद्य यंत्र वादकों में गुड्डू दास व मनोज दास (मौटी), पूर्ण दास (लाखामंडल) और रघुदास (छोटा चंदू) को सम्मान मिला। काष्ठ कला एवं मंदिर निर्माण के क्षेत्र में भगत वर्मा (भटाड) और मानु (लावडी) को सम्मानित किया गया। लोहार वर्ग से बलबीर (लाउडी) और जुदवीर (भटाड), नाई वर्ग से अमित (ग्राम गोदीन) तथा दरज़ी वर्ग से गुलियो (पणखेत), भगत (छौंटाड) और भगत वर्मा (कांडी) को सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मेलन के समापन पर आयोजकों ने इसे हिंदू संस्कृति, पारिवारिक एकता और लोक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
