देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति का प्रतीक फूलदेई लोकपर्व उत्तरांचल यूनिवर्सिटी परिसर में पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। “फूल देई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार” के पारंपरिक गीतों के साथ छात्र-छात्राओं ने वसंत ऋतु का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने वरिष्ठजनों को तिलक लगाकर पुष्प अर्पित किए और संस्थान की उन्नति के लिए मंगलकामनाएं कीं। चैत्र मास की संक्रांति पर मनाए जाने वाले इस पर्व की परंपरा के अनुसार बच्चे घर-घर जाकर दहलीज पर फूल चढ़ाते हैं और खुशहाली की कामना करते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्तरांचल यूनिवर्सिटी की लिटरेरी कमेटी के छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय की उपाध्यक्षा सुश्री अंकिता जोशी को तिलक लगाकर पुष्प भेंट किए और संस्थान की प्रगति की कामना की।
इस अवसर पर साहित्य सभा के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित और उपाध्यक्षा डॉ. पिंकी चुग को भी पुष्प अर्पित कर शुभकामनाएं दी गईं। साथ ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अनुज राणा को तिलक लगाकर विद्यार्थियों ने समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की।
कार्यक्रम में साहित्य सभा से जुड़े छात्र-छात्राओं राहुल रावत, आदर्श कुमार तिवारी, अपूर्वा पुंडी, भूमिका रौथा, प्रकृति नेगी, रजत चौहान, आशुतोष नौटियाल, हर्षित भटनागर, नम्रता खरे, प्रेमांजन तिवारी और फाल्गुनी देओपा ने पारंपरिक ढंग से फूल अर्पित कर वसंत ऋतु का स्वागत किया। लोकगीतों और उल्लासपूर्ण माहौल के बीच पूरे परिसर में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली।
