देहरादून। श्रीमद् भागवत सेवा जन कल्याण समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान गोवर्धन लीला का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास पवन नंदन महाराज ने बताया कि जब देवराज इन्द्र अपने अहंकार में चूर होकर ब्रजवासियों पर प्रलयंकारी वर्षा करने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों की रक्षा हेतु मात्र सात वर्ष की आयु में ही अपनी कनिष्ठा उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठाकर समस्त ब्रजवासियों को आश्रय प्रदान किया। सात दिनों तक निरंतर वर्षा के बीच भगवान ने सभी की रक्षा की और अंततः इन्द्र का अहंकार चूर-चूर कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से पवन नंदन ने यह संदेश दिया कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और अहंकार का अंत निश्चित है।
कथा में गोवर्धन पूजा के महत्व को भी विस्तार से बताया गया। श्रीकृष्ण ने इन्द्र पूजा के स्थान पर प्रकृति स्वरूप गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा प्रारंभ कर मानव को प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया। इस अवसर पर भगवान को विधि-विधान के साथ छप्पन भोग अर्पित किए गए, जिससे पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया।
पंचम दिवस पर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी अत्यंत सजीव चित्रण किया गया। माखन चोरी की चंचल लीलाएं, माटी खाने का प्रसंग और माता यशोदा को मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन कराने की अद्भुत लीला ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान के बाल स्वरूप की दिव्यता और सरलता का मनमोहक चित्र प्रस्तुत किया गया।
कथा के दौरान गाए गए मधुर भजन-कीर्तन ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूमते नजर आए और पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर कथा का रसपान किया।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक विनोद राई, अध्यक्ष प्रेम सिंह भंडारी, उपाध्यक्ष अभिषेक परमार, महासचिव नवीन जोशी, कोषाध्यक्ष के.एन. लोहनी, सुमित मेहता, बृज किशोर यादव, मीडिया प्रभारी गणेश सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मालती राई, प्रमिला नेगी, कादंबरी शर्मा, तारा राई, ममता राई, रेखा यादव, दीपक गोसाईं एवं प्रदीप राई सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया तथा सभी श्रद्धालुओं ने अगले दिवस की कथा में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने का संकल्प लिया।
