देहरादून, एयर अटैक की सूचना के दृष्टिगत जनपद में निर्धारित मानकों के अनुरूप त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की गई। सूचना मिलते ही शहरी क्षेत्रों में तत्काल ब्लैक आउट लागू किया गया। शहर के चार स्थानों—घंटाघर, डील रायपुर, आराघर एवं आईएसबीटी क्षेत्र—में बमबारी की सूचना प्राप्त हुई।
रात्रि 10:05 बजे पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (EOC) को सक्रिय कर दिया गया तथा इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। दूरसंचार, मोबाइल, वायरलेस एवं हॉटलाइन माध्यमों से सतत संपर्क बनाए रखा गया। सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी कंट्रोल रूम में तैनात रहकर स्थिति की निरंतर मॉनिटरिंग करते रहे। सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को भी सक्रिय करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया।
प्रभावित क्षेत्रों में रात्रि 10:05 बजे से 10:35 बजे तक पूर्ण ब्लैक आउट सुनिश्चित किया गया। आईएसबीटी क्षेत्र में रात्रि 10:34 बजे बम विस्फोट की सूचना प्राप्त हुई, जिसमें भवन को क्षति पहुंची। इस घटना में 04 व्यक्तियों की मृत्यु, 06 गंभीर रूप से घायल एवं 05 सामान्य घायल होने की सूचना है। सभी घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार हेतु दून चिकित्सालय भेजा गया।
आराघर क्षेत्र में रात्रि 10:36 बजे बम गिरने की सूचना प्राप्त हुई, जो विस्फोटित नहीं हुआ। एक्सप्लोसिव ऑर्डिनेंस डिस्पोजल (EOD) टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए बम को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया गया। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अर्द्धसैनिक बलों, स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन की संयुक्त टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी रूप से संचालित किए गए।
घंटाघर क्षेत्र में बमबारी के कारण निकटवर्ती बस्ती की पुलिया क्षतिग्रस्त हुई तथा विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति बाधित हुई, जिसकी बहाली हेतु संबंधित विभागों द्वारा कार्यवाही जारी है। डील रायपुर एवं आराघर क्षेत्रों में किसी प्रकार की जनहानि या विशेष क्षति की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
मॉक ड्रिल के दौरान सभी स्थलों पर सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक तैनात रहे, जिनमें घंटाघर में 52, आराघर में 52, आईएसबीटी में 36 तथा डील रायपुर में 12 स्वयंसेवक शामिल थे।
भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारी, समन्वय एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।





