देहरादून, । ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में ‘कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी’ और सतत खाद्य प्रणालियों में उभरती तकनीकों विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का बुधवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा कि आईओटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकें कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी और सतत खाद्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बना रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करते हुए उत्पादन क्षमता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश को खाद्यान्न संकट से उबारने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया, लेकिन इससे खाद्यान्न की पोषण गुणवत्ता प्रभावित हुई। अब आवश्यकता इस बात की है कि फसलों की पोषण गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उत्पादकता में वृद्धि की जाए। डॉ. सारस्वत ने कहा कि वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या लगभग 10 अरब तक पहुंच जाएगी, जिससे खाद्य सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है। घटती कृषि भूमि, जल संकट, परागण करने वाले कीटों की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के बीच जलवायु-प्रतिरोधी एवं टिकाऊ फसलों के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने प्रिसिजन एग्रीकल्चर को वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि डेटा माइनिंग, क्वांटम कम्प्यूटिंग और एआई जैसी उभरती तकनीकें भविष्य के शोध का आधार बन रही हैं। इनके माध्यम से जीन अध्ययन, जेनेटिक वेरिएंट्स के विश्लेषण और विभिन्न बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक मानसून पूर्वानुमान, खाद्य आदतों के अध्ययन और फसलों की स्थिति के विश्लेषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि कम्प्यूटेशनल टेक्नोलॉजी का विभिन्न क्षेत्रों के साथ एकीकरण भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। छात्र-छात्राओं और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी जैसे क्षेत्र वैज्ञानिक प्रगति की नई दिशा तय कर रहे हैं।
तीन दिवसीय सम्मेलन में 10 तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, सतत खाद्य प्रणाली, फूड सिक्योरिटी, ड्रग डिजाइनिंग, डायग्नोस्टिक्स, जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ कृषि, पोषण सुरक्षा और हेल्थकेयर इनोवेशन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश देते हुए डॉ. वी.के. सारस्वत और डॉ. यू.के. सिंह ने रुद्राक्ष के पौधे भी लगाए।
सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंसेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो वीसी डॉ. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंस की प्रमुख डॉ. मनु पंत, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट विभाग के प्रमुख डॉ. अमर डबराल सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





