देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में चल रहे विवादों के बीच शासन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए वित्त नियंत्रक मनीष उप्रेती को हटा दिया है। उनके स्थान पर वित्त अधिकारी हेम कांडपाल को बीकेटीसी के वित्त अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
उत्तराखंड शासन के उप सचिव वित्त सुनील कुमार सिंह द्वारा 18 मई को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार वित्त नियंत्रक कृषि निदेशालय मनीष उप्रेती से बीकेटीसी का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। अब उप निदेशक सीटीआरएफए, देहरादून हेम कांडपाल बीकेटीसी के वित्त अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे।
मनीष उप्रेती को पिछले वर्ष जून में बीकेटीसी में तैनाती दी गई थी। एक वर्ष से कम समय में उन्हें हटाए जाने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। उप्रेती से पहले परिवहन विभाग के वरिष्ठ वित्त अधिकारी आनंद सिंह बीकेटीसी में तैनात थे। उन्हें भी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के कार्यभार संभालने के लगभग एक माह बाद हटा दिया गया था। उस समय भी उनके तबादले को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं।
बीकेटीसी पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बना हुआ है। यात्रा व्यवस्थाओं में अव्यवस्था और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते समिति की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में रही है। इसी बीच अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकेश नेगी द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगे गए दस्तावेजों के सोशल मीडिया पर वायरल होने से मामला और गर्मा गया है।
आरटीआई से सामने आई जानकारियों में केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों को लगभग 11 लाख रुपये वितरित किए जाने का मामला चर्चा में है। इसके अलावा बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण पर पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दर्शाकर प्रतिमाह 12 हजार रुपये लेने तथा रुद्रप्रयाग में कार्यालय के नाम पर 25 हजार रुपये प्रतिमाह लेने के आरोप भी सामने आए हैं।
वहीं, केदारनाथ धाम में भाजपा और संघ से जुड़े कई नेताओं के होटल बिल सार्वजनिक होने के बाद बीकेटीसी की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।






