नई दिल्ली, । एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) ने वर्ष 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कोविड काल के बाद सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की है। cpaaustralia.com.au� द्वारा जारी एशिया-प्रशांत लघु उद्योग सर्वेक्षण 2025/26 के अनुसार, बढ़ती लागत और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय कारोबारियों का आत्मविश्वास लगातार मजबूत बना हुआ है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, वर्ष 2025 में 80 प्रतिशत भारतीय लघु उद्योगों ने कारोबार में वृद्धि दर्ज की, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का औसत 63 प्रतिशत रहा। वहीं, 87 प्रतिशत भारतीय कारोबारियों को वर्ष 2026 में अपने व्यवसाय के और विस्तार की उम्मीद है तथा 84 प्रतिशत देश की आर्थिक मजबूती को लेकर आश्वस्त हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर ग्राहक सेवा, कुशल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग ने भारतीय एमएसएमई को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हाल के मुक्त व्यापार समझौतों और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों से निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं, जिससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों में मजबूती मिली है।
हालांकि, बढ़ती लागत उद्योगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। सर्वेक्षण में 42 प्रतिशत कारोबारियों ने लागत वृद्धि को सबसे बड़ी समस्या बताया। कच्चे माल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
भारत में CPA Australia के प्रवक्ता और फ़ेलो (एफसीपीए) अनिकेत तलाटी ने कहा कि भारतीय एमएसएमई ने मजबूत घरेलू मांग और सरकारी सहयोग के दम पर उल्लेखनीय आत्मविश्वास दिखाया है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों ने नए निर्यात बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और शुल्कों के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने यह भी कहा कि मार्च के बाद बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण हुआ है। ऐसे में उद्योगों को बेहतर योजना, लागत नियंत्रण, जोखिम प्रबंधन तथा नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक संसाधनों में निवेश पर ध्यान देना होगा।
रोजगार सृजन में एमएसएमई की बड़ी भूमिका
सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2025 में 52 प्रतिशत भारतीय लघु उद्योगों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई, जबकि 69 प्रतिशत उद्योग वर्ष 2026 में नई भर्तियां करने की योजना बना रहे हैं। यह आंकड़ा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों से बेहतर है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत के 56 प्रतिशत लघु उद्योग मालिकों की उम्र 40 वर्ष से कम है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के औसत 38 प्रतिशत से काफी अधिक है। युवा उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी से डिजिटल तकनीक, नवाचार और आधुनिक कारोबारी मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स में भारत सबसे आगे
भारतीय एमएसएमई डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स अपनाने में भी अग्रणी बने हुए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, 89 प्रतिशत भारतीय लघु उद्योगों ने अपनी कुल आय का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा डिजिटल भुगतान माध्यमों से प्राप्त किया, जो पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।
इसके अलावा, 74 प्रतिशत उद्योगों ने अपनी कमाई का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से अर्जित किया। हर 10 में से 9 उद्योग कारोबार से जुड़े कार्यों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं।
एआई निवेश में तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एमएसएमई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर तेजी से रुचि बढ़ी है। वर्ष 2025 में एआई में निवेश करने वाले उद्योगों का अनुपात 26 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा, 35 प्रतिशत उद्योगों ने क्लाउड कंप्यूटिंग और 30 प्रतिशत ने ग्राहक संबंध प्रबंधन प्रणालियों में निवेश किया।
करीब 41 प्रतिशत उद्योगों ने कारोबारी सलाह और निर्णय लेने के लिए एआई उपकरणों का उपयोग किया, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था। सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल तकनीक में निवेश से कई व्यवसायों के मुनाफे में सुधार हुआ है और यही तकनीक भारतीय एमएसएमई के विकास की नई आधारशिला बन रही है।
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा जोखिम भी तेजी से बढ़े हैं। सर्वेक्षण में 47 प्रतिशत उद्योगों ने माना कि उन्हें साइबर हमलों के कारण समय या धन का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, आधे भारतीय एमएसएमई का मानना है कि इस वर्ष उन्हें साइबर हमले का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल विस्तार के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र विकसित करना अब भारतीय उद्योगों की बड़ी आवश्यकता बन चुका है।






