देहरादून। दिल्ली के राजघाट में अपनी बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मौन व्रत पर बैठे उसके माता-पिता की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी किए जाने पर राजनीतिक आक्रोश सामने आया है। इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
वक्ताओं ने कहा कि अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे माता-पिता को गिरफ्तार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है। आखिर न्याय की मांग करना कब से अपराध हो गया? उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग लगातार उठ रही है, वहीं दूसरी ओर न्याय की गुहार लगाने वाले पीड़ित परिवार की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई कर रही है। अंकिता को न्याय दिलाने की मांग किसी राजनीतिक स्वार्थ का विषय नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वक्ताओं ने मांग की कि अंकिता के माता-पिता को तत्काल रिहा किया जाए और उनकी न्याय की मांग को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि गिरफ्तारी और दमनात्मक कार्रवाई से जनआक्रोश को दबाया नहीं जा सकता। अंकिता को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।













