मुज़फ्फरनगर, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के महापर्व कांवड़ यात्रा के बीच अब पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। इसी उद्देश्य से एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (एपीआर भारत) ने ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ नामक विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं को उपयोग के बाद पीईटी बोतलों को इधर-उधर फेंकने के बजाय पृथक रूप से एकत्रित कर रीसाइक्लिंग के लिए देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
15 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में विशेष रूप से तैयार की गई जागरूकता वैन मुज़फ्फरनगर और मेरठ के कांवड़ मार्ग के चार प्रमुख स्थलों पर संचालित होगी। वैन मोबाइल सूचना एवं संग्रह केंद्र के रूप में कार्य करेगी, जहां श्रद्धालुओं को प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निपटान और पीईटी बोतलों की वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान 35 हजार से अधिक पीईटी बोतलों को औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रणाली से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एपीआर भारत के डायरेक्टर जनरल गौतम जैन ने कहा कि कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के माध्यम से लाखों लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा सकता है कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल कचरा नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। यदि इसका जिम्मेदारीपूर्वक संग्रह और रीसाइक्लिंग की जाए तो यही बोतल दोबारा नई बोतल का रूप ले सकती है और देश की सर्कुलर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2026-27 तक प्लास्टिक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग को अनिवार्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। ऐसे में पीईटी बोतलों का अधिक से अधिक संग्रह और रीसाइक्लिंग विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने, संसाधनों की बचत करने तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एपीआर भारत के अनुसार, कांवड़ यात्रा में शुरू किया गया यह पायलट अभियान भविष्य में पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों तक भी विस्तारित किया जाएगा, ताकि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार रीसाइक्लिंग का संदेश देशभर में प्रभावी रूप से पहुंचाया जा सके।








