देहरादून। ग्राफिक एरा अस्पताल को लेकर एक भ्रामक, तथ्यों के विपरीत एवं दुर्भावनापूर्ण वीडियो सोशल मीडिया पोर्टल पर प्रसारित किया जा रहा है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए वास्तविक तथ्य सार्वजनिक किए जा रहे हैं।
वस्तुस्थिति यह है कि दिनांक 08 फरवरी को एक 57 वर्षीय महिला रोगी को अत्यंत नाजुक अवस्था में ग्राफिक एरा अस्पताल लाया गया था। चिकित्सीय जांच के दौरान रोगी की बड़ी आंत (कोलन) में कैंसर की पुष्टि हुई। कैंसर की गंभीर स्थिति के चलते रोगी को इंटेस्टाइनल परफोरेशन हो गया, जिसके परिणामस्वरूप संक्रमण पेट एवं गुर्दों तक फैल गया था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 08 फरवरी की शाम को ही रोगी का आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन से पूर्व रोगी की हालत एवं संभावित जोखिमों के बारे में परिजनों को पूरी तरह अवगत करा दिया गया था। दुर्भाग्यवश, चिकित्सकों द्वारा किए गए अथक प्रयासों के बावजूद रोगी को बचाया नहीं जा सका।
अस्पताल प्रशासन ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए एवं परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लगभग डेढ़ लाख रुपये का संपूर्ण अस्पताल बिल माफ कर दिया। इसके अतिरिक्त, महिला का शव उसी समय पूरे सम्मान के साथ परिजनों को सौंप दिया गया था।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शव रोके जाने अथवा अमानवीय व्यवहार से जुड़े आरोप पूरी तरह निराधार, असत्य और शर्मनाक हैं। ऐसे झूठे वीडियो न केवल समाज को गुमराह करते हैं, बल्कि एक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी हैं।
इस प्रकार के झूठे और भ्रामक वीडियो तैयार कर प्रसारित करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे असत्य एवं अप्रमाणिक सूचनाओं पर विश्वास न करें और तथ्यों को समझने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालें।
