देहरादून/नई दिल्ली। मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी को देखते हुए भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। IMA ने लोगों से फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर खुद से एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं लेने से बचने तथा गंभीर लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की है। संस्था ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है।
कई राज्यों में संक्रमण के मामले
IMA के अनुसार देश के कई हिस्सों में H1N1 संक्रमण में मौसमी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली में 1,770 से अधिक लैब से पुष्ट मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में भी संक्रमण के मामले रिपोर्ट हुए हैं। ICMR की निगरानी के अनुसार फिलहाल देश में फैल रहा वायरस मौसमी इन्फ्लुएंजा ए (H1N1) ही है। अभी तक किसी नए आनुवंशिक बदलाव या म्यूटेशन की जानकारी सामने नहीं आई है।
अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण
IMA ने बताया कि H1N1 संक्रमण के अधिकांश मामले हल्के होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, बदन व मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, सिरदर्द तथा नाक बहना या बंद होना शामिल हैं। बच्चों में मतली, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचें
IMA ने स्पष्ट किया कि H1N1 एक वायरल संक्रमण है और एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर प्रभावी नहीं होतीं। फ्लू के लक्षण होने पर एजिथ्रोमाइसिन, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलैनेट, सेफिक्सिम अथवा अन्य एंटीबायोटिक दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए। अनावश्यक एंटीबायोटिक सेवन से शरीर के लाभकारी माइक्रोबायोम पर असर पड़ सकता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा बढ़ सकता है।
IMA के मुताबिक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल चिकित्सकीय जांच के बाद बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि होने पर ही किया जाना चाहिए। वहीं, एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर भी प्रिस्क्रिप्शन दवा है और इसका सेवन डॉक्टर की सलाह एवं निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
सांस फूलना और सीने में दर्द गंभीर संकेत
IMA ने सांस लेने में कठिनाई, सांस फूलना या तेजी से सांस चलना, सीने में दर्द अथवा लगातार दबाव और होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना गंभीर चेतावनी संकेत बताए हैं। खांसी के साथ खून आना, अत्यधिक सुस्ती, भ्रम, असामान्य नींद, दौरे पड़ना या लगातार उल्टी होना भी तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के संकेत हैं।
बच्चों में दूध या भोजन न ले पाना, अत्यधिक सुस्ती, सांस लेते समय असामान्य आवाज आना अथवा सांस लेते समय सीने का अंदर की ओर धंसना गंभीर लक्षण माने जाते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है।
हाथ धोने और मास्क के इस्तेमाल पर जोर
संक्रमण से बचाव के लिए IMA ने साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने अथवा अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू अथवा मुड़ी हुई कोहनी से ढकने की अपील की गई है। भीड़भाड़ और बंद स्थानों पर अच्छी तरह फिट मास्क पहनना भी संक्रमण का खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
IMA ने सलाह दी है कि बुखार कम करने वाली दवाओं के बिना बुखार पूरी तरह समाप्त होने के बाद कम से कम 24 घंटे तक स्कूल, कार्यस्थल और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाए रखें।
इन लोगों को टीके की सलाह
IMA ने स्वास्थ्यकर्मियों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों तथा गंभीर या पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को हर साल मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है।
यह एडवाइजरी IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिलकुमार जे. नायक और मानद महासचिव डॉ. सरबरी दत्ता ने जारी की है। IMA AMR समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सैनी और समिति के संयोजक डॉ. वेंकटेश कार्तिकेयन ने भी एडवाइजरी पर हस्ताक्षर किए हैं।
IMA की अपील: मौसमी H1N1 संक्रमण को लेकर सतर्क रहें, बिना चिकित्सकीय सलाह दवाओं का सेवन न करें और गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें। मौसमी मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद वर्तमान स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है।













