देहरादून, ,क्लेमनटाउन स्थित रघुनाथ मंदिर में दिव्य कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्री देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मंडली के सानिध्य में रघुनाथ मंदिर से 1100 महिलाओं ने सिर पर दिव्य जल कलश धारण कर छावनी क्षेत्र व टर्नर रोड की समस्त गलियों से होते हुए जय माता दी के गगनभेदी जयकारों के साथ मछली तालाब के समीप स्थित कथास्थल रघुनाथ मंदिर परिसर में सजे भव्य पंडाल में प्रवेश किया।
यहां वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्तिवाचन मंत्रोच्चार के साथ श्री देवी भागवत महापुराण एवं कलशों की विधिवत पूजा-अर्चना कर स्थापना की गई।
इस अवसर पर व्यासपीठ पर विराजमान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि देवी भागवत का प्रत्यक्ष फल स्वयं मां जगदम्बा हैं। मानव जीवन ईश्वरीय अनुग्रह है, जो धर्म की सिद्धि, अस्तित्व के जागरण और सत्य की प्राप्ति के लिए प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थायी सुख भौतिक साधनों या क्षणिक आनंदों में नहीं, बल्कि सत्य, विवेक, त्याग, सेवा, सत्संग और शुभ संकल्पों में निहित है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि सत्य केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। सत्य बोलना मात्र नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की आध्यात्मिक विधि है। सत्य में वह शक्ति है, जो मन को शांत करता है, संबंधों को सुदृढ़ बनाता है और आत्मा को ईश्वर के समीप ले जाता है। झूठ व्यक्ति को कभी स्थायी सफलता और सम्मान नहीं दिला सकता, जबकि सत्यनिष्ठ व्यक्ति ही जीवन में अनुकूलता और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि मन को साधना कठिन अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं, क्योंकि मन ही मनुष्य के पतन और उत्थान दोनों का कारण बनता है।
कार्यक्रम में नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान भारतवर्ष की राष्ट्रीय प्रभारी साध्वी मां देवेश्वरी जी, कीर्तन मंडली की संयोजक मंजू कोटनाला, नीमा रौथाण, अंजू विष्ट, बंगला रानी, सरोज थपलियाल सहित शहर की अनेक सनातनी कीर्तन मंडलियों की महिलाएं, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
