Prabhat Chingari
उत्तराखंडजीवन शैली

आपदा के बाद आंकलन नहीं, पूर्व चेतावनी और प्राकृतिक सुरक्षा प्रणालियों की समझ ज़रूरी : राज्यपाल

 

 

देहरादून। विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन 2025 के अंतिम दिन नवाचार, समावेशन और आपदा प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर केंद्रित सत्रों का आयोजन किया गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राज्यपाल ले.ज.(रि.) गुरमीत सिंह ने कहा कि विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और आपदा प्रबंधन के लिए एक सशक्त आन्दोलन है। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद आंकलन के बजाय हमें पूर्व चेतावनी तंत्र और प्राकृतिक सुरक्षा प्रणालियों की बेहतर समझ विकसित करने की आवश्यकता है।

 

राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि आपदाओं से निपटने का समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकों के संतुलित प्रयोग में निहित है। आपदा प्रबंधन मूल रूप से संतुलन और स्थिरता का विज्ञान है, जिसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना होगा।

 

समारोह में राज्यपाल ने विज्ञान सम्मेलन के विजेता युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। इसके साथ ही राज्य के 95 ब्लॉकों से चयनित प्रीमियर लीग के विजेताओं को भी सम्मान प्रदान किया गया।

 

यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने तीन दिवसीय सम्मेलन की उपलब्धियों और सुझावों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 28 नवंबर को ‘सिलक्यारा विजय दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा महत्वपूर्ण पहल है। इस दौरान उन्होंने सम्मेलन के ‘देहरादून डिक्लेरेशन’ को भी पढ़ा।

 

समारोह के विशिष्ट अतिथि पद्मश्री, पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने सुझाव दिया कि जलवायु परिवर्तन के विगत दशक के आँकड़ों का गहन अध्ययन कर उसके अनुरूप भविष्य की नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य राजेंद्र सिंह ने ‘सचेत’ और ‘आपदा मित्र’ एप्लीकेशन की जानकारी देते हुए प्राधिकरण के प्रयासों से सबको अवगत कराया।

 

कार्यक्रम के अंत में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कमल घनसाला ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सहयोग और सहभागिता के माध्यम से ही समुदायों को सशक्त बनाया जा सकता है।

 

सम्मेलन में देश-विदेश से आए अधिकारी, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधार्थी तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। तीन दिवसीय आयोजन में 350 से अधिक वक्ताओं ने विचार रखे, जबकि प्रतिदिन 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। पूरे सम्मेलन के दौरान 500 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

इन तीन दिनों में जलवायु-जल-आपदा संबंध, हिमालयी पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका, समावेशी समुदाय सुरक्षा तथा एससी-एसटी समुदायों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

Related posts

पंच व्यास भागवत महोत्सव का आगाज, 208 देवियों के कलश धारण से गूंजेगा क्षेत्र…

cradmin

रंग, संगीत और उत्साह के संग संपन्न हुआ श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक सप्ताह

cradmin

खेल पर्यटन का तीर्थ बना उत्तराखंड : रेखा आर्या

cradmin

उत्तराखण्डी फिल्म ‘मीठी- मां कु आशीर्वाद’ का पोस्टर व प्रोमो रिलीज

prabhatchingari

मुख्यमंत्री ने पुरोला में लगभग ₹ 210 करोड़ की विकास योजनाओं का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास।

cradmin

दुःखद खबर: गंगनानी में हेलीकॉप्टर क्रैश, 5 लोगों की मौत की आशंका

prabhatchingari

Leave a Comment