
देहरादून, विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इंटेलिजेंस का एकीकरण विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान खोजने में मददगार साबित होगा।
यह बात विशेषज्ञों ने ग्राफिक एरा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग जंगलों की आग बुझाने, खेतों में सिंचाई प्रणाली को सुधारने, फसलों के विकास का निरीक्षण करने, मिट्टी की गुणवत्ता जांचने व खाद्य सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। इसमें मशीन लर्निंग, प्रीसीजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह तकनीकें सस्टेनेबल हैं। उन्होंने छात्र- छात्राओं को क्लीन कंप्यूटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, एच- कंप्यूटिंग, ऑप्टिमाइज्ड सॉफ्टवेयर, एनर्जी एफिशिएंट हार्डवेयर व अन्य सस्टेनेबल तकनीकों पर शोध करने के लिए प्रेरित किया।
ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. गिरीश गुप्ता ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके तहत मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग मरीज की जानकारी इकट्ठा करने, डेटा विश्लेषण, वास्तविक समय में बीमारी का पता लगाने और जरूरत के हिसाब से मरीज का उपचार करने में किया जा रहा है। ये तकनीकें इतनी विकसित हो चुकी हैं कि विशेषज्ञ फीटल प्रोग्रामिंग की मदद से जन्म से पहले ही बच्चे को भविष्य में होने वाली बीमारियों का पता लगाने में सफलता हासिल कर रहें हैं। उन्होंने छात्र- छात्राओं से चिकित्सा को और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शोधकार्य करने का आवाहन किया।
सम्मेलन में आनलाइन मोड से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ़ प्लाईमाउथ, यूनाइटेड किंगडम के डॉ. बोगदन घीता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विस्तार से जानकारी दी। आईआईटी रुड़की के डॉ. संदीप कुमार गर्ग ने सस्टेनेबल कंप्यूटिंग की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्मारिका का विमोचन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन आज 60 शोध पत्र पढ़े गए।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग ने किया। सम्मेलन में डीन अकेडमिक्स डॉ. संतोष एस. सर्राफ, डीन रिसर्च डॉ. भास्कर पंत, एचओडी, डॉ. देवेश प्रताप सिंह, डीआरसी चेयरमैन डॉ. अरुण चौहान, आई टिपल ई यूपी सेक्शन के डॉ. के. सी. मिश्रा, कार्यक्रम संयोजक डॉ. नीलम सिंह व डॉ. पारुल मदान, डॉ. मनोज दिवाकर, डॉ. अंकित विश्नोई, डॉ. वर्षा मित्तल, डॉ. पवन कुमार मिश्रा, डॉ अंकित तोमर के साथ अन्य शिक्षक- शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन डॉ. अमित कुमार, डॉ. मानसी शर्मा और सुप्रिया अवस्थी ने किया।
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