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उत्तराखंडधर्म–संस्कृति

भक्ति के लिए पहले अहंकार का त्याग जरूरी – स्वामी रसिक महाराज

 

देहरादून,। नवदुर्गा मंदिर, पोस्ट ऑफिस कॉलोनी, क्लेमेंटाउन में आयोजित शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिव भक्ति और शिव महापुराण कथा के श्रवण के लिए सर्वप्रथम अहंकार का त्याग करना आवश्यक है। जब तक अहंकार बना रहेगा, तब तक भोलेनाथ की कृपा प्राप्त नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है और वे भी केवल सरल हृदय व अहंकाररहित भक्तों से प्रसन्न होते हैं। युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने नशे से दूर रहने और सनातन धर्म की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

स्वामी जी ने कहा कि सनातन संस्कृति “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के भाव को आत्मसात करती है तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को संतुलित रूप से जीवन में अपनाने का मार्ग दिखाती है। वेदों में मंत्र, तंत्र, ज्योतिष, संगीत, स्वास्थ्य एवं परामनोविज्ञान जैसे विषयों पर गूढ़ विश्लेषण कर समाज को दिशा दी गई है।

श्रावण मास का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह माह धार्मिक अनुष्ठानों, तांत्रिक प्रयोगों एवं दिव्यता की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, भले ही इस दौरान विवाह या वास्तु पूजन जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हों।

कार्यक्रम में नवदुर्गा मंदिर की संस्थापक सदस्य  सत्तेश्वरी मुंडेपी, अनीता जैदली, बबली असवाल, विनोद राई , बृज किशोर यादव,अनीता विडालिया, दिनेश डबराल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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