देहरादून,। ग्राफिक एरा अस्पताल ने एक रोगी की प्राण रक्षा के प्रयासों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित किये जाने पर सख्त एतराज करते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। डॉक्टरों ने कहा है कि नाउम्मीदी के बावजूद ग्राफिक एरा अस्पताल की इमरजेंसी टीम ने युवा महिला को बचाने का हर संभव प्रयास किया। मृतका के परिवार ने भी सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रसारित किये जाने पर आपत्ति की है।
ग्राफिक एरा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि उपरोक्त महिला को विकासनगर के अस्पताल में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने पर गंभीर हालत में ग्राफिक एरा अस्पताल लाया गया था। लगातार रक्तस्राव से महिला अचेत और असंवेदनशील हो गई थी। अस्पताल पहुंचने तक उसकी सांस रुक गई थी। नाउम्मीदी के बावजूद अस्पताल की इमरजेंसी की टीम ने इस 30 वर्षीय महिला की प्राणरक्षा के लिए पूरी क्षमता से लगातार प्रयास किये। एसीएलएस प्रोटोकॉल के अनुसार सीपीआर देने के साथ ही अन्य सभी कदम उठाये गए, लेकिन डेढ़ घंटे के अथक प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। विषम हालात में डॉक्टरों के नाउम्मीद होकर मरीज को मना कर देने के बजाय डेढ़ घंटे लगकर प्राणरक्षा के प्रयास करने की सराहना की जानी चाहिये। यह चिकित्सा व्यवसाय के उच्च आदर्शों और कार्य के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है। इसकी सराहना करने के बजाय सोशल मीडिया में कुछ लोग इसे लेकर झूठी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं। ऐसे तत्वों को पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
उधर, मृतका के भाई अनिल चौहान ने जिला प्रशासन के अधिकारियों और ग्राफिक एरा अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर किये जा रहे भ्रामक प्रचार पर आपत्ति करते हुए कहा है कि इससे उनके परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उनकी बहन को बचाने का भरसक प्रयास किया। उन्हें डॉक्टरों और अस्पताल से कोई शिकायत नहीं है।
