देहरादून, श्री रघुनाथ मंदिर, क्लेमनटाउन में मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आज हवन एवं विशाल भंडारे के साथ विधिवत, भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन हुआ। यह दिव्य आयोजन सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) पूज्य स्वामी रसिक महाराज के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शक उद्बोधन से विशेष रूप से अनुप्राणित रहा। नौ दिनों तक उनके श्रीमुख से प्रवाहित देवी भागवत की ज्ञान-गंगा ने श्रोताओं के हृदय, चिंतन और जीवन को गहराई से स्पर्श किया।
समापन अवसर पर पूज्य स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि श्रीमद् देवी भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। हमारे शास्त्रों में भारतीय संस्कृति, मूल्य और जीवन-दृष्टि समाहित है। देवी भागवत हमें स्मरण कराती है कि हम कौन हैं, हमारा उद्देश्य क्या है और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान, कर्म, करुणा और सेवा का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है।
वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि आज जब समाज तनाव, अवसाद, हिंसा और मूल्यहीनता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में कथाओं की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। कथा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य का मार्गदर्शन है। जब मन भटकता है, कथा दिशा देती है; जब जीवन सूना लगता है, कथा आशा जगाती है; और जब समाज बिखरता है, कथा उसे जोड़ने का कार्य करती है।
उन्होंने कहा कि देवी भागवत यह संदेश देती है कि भक्ति पलायन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है; प्रेम दुर्बलता नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है; और सेवा ही सच्ची साधना है। मां जगदम्बा का संपूर्ण चरित्र लोककल्याण, धर्मरक्षा और मानवता की स्थापना का प्रेरक उदाहरण है। पूज्य स्वामी ने आह्वान किया कि कथा को केवल सुनना पर्याप्त नहीं, उसे जीवन में उतारना ही उसका वास्तविक उद्देश्य है। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, हरित कथाओं तथा सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भंडारों के आयोजन का संदेश भी दिया।
समापन अवसर पर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी उपस्थित जनसमुदाय को सनातनी संस्कृति अपनाने का आग्रह किया तथा भगवती मां जगदम्बा के क्षमा स्तोत्र के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में ज्वाल्पा देवी कीर्तन मण्डली की संयोजक मंजू कोटनाला, नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान भारतवर्ष की राष्ट्रीय प्रभारी साध्वी मां देवेश्वरी जी, धर्मपुर विधायक विनोद चमोली सहित समाजसेवी विनोद राई, नीमा रौथाण, अंजू ध्यानी, बंगला रानी, अंजू विष्ट, कमला रावत, सत्तेश्वरी कुकरेती, सरोज थपलियाल, सुशीला बुटोला, लता सिंह, रमा लिंगवाल, सम्पूर्णानंद मुंडेपी, नरेन्द्र कोटनाला, बालव्यास दामोदर नौडियाल, पं. महावीर पंत, अजय कोठारी, रवि जोशी, मोहित पंत, करन नेगी, रोशन भट्ट सहित बड़ी संख्या में सनातनी भक्त उपस्थित रहे।
