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अहंकार विनाश का कारण, विनम्रता से मिलती है कृपा — स्वामी रसिक महाराज

By: Naveen Joshi

On: Sunday, February 1, 2026 10:57 PM

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देहरादून,  श्री रघुनाथ मंदिर, क्लेमनटाउन में मां ज्वाल्पा देवी कीर्तन मंडली द्वारा आयोजित श्री देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के आठवें दिन व्यासपीठ से नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने श्रद्धालुओं को संतोष, कृतज्ञता और विनम्रता का गूढ़ संदेश दिया। उन्होंने मां जगदम्बा के 108 शक्ति पीठों का वर्णन करते हुए कहा कि कृतज्ञता से ही पात्रता उत्पन्न होती है और पात्रता से प्राप्ति संभव होती है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि ईश्वर ने हमें जो भी प्रदान किया है, उसके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। कृतज्ञता से श्रद्धा, विश्वास और विनम्रता का भाव विकसित होता है। उन्होंने कहा कि प्रायः मनुष्य ईश्वर से निरंतर मांग करता रहता है, किंतु जब वह मांग पूरी हो जाती है तो उसका स्मरण तक नहीं करता और नई इच्छाओं की सूची प्रारंभ कर देता है। यदि हम अपने जीवन के अनुभवों और इच्छाओं को लिखकर समय-समय पर पलट कर देखें तो पाएंगे कि ईश्वर ने हमारी अधिकांश प्रार्थनाएं पूर्ण की हैं, फिर भी हम आभार व्यक्त करने के स्थान पर नई मांगों में उलझे रहते हैं।

उन्होंने कहा कि प्राप्ति को अपनी योग्यता मान लेना और उसमें ईश्वर की कृपा का दर्शन न करना ही अहंकार को जन्म देता है, और अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है। जो कृतज्ञ होता है, उसके प्रति दाता का मन और देने का होता है, जबकि असंतोष और अकृतज्ञता से छीन लेने की भावना उत्पन्न होती है। यही कारण है कि कई बार योग्य व्यक्ति भी प्राप्ति से वंचित रह जाता है, क्योंकि उसमें विनम्रता के स्थान पर अहंकार होता है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि संतोष ही परम धन है — “संतोषम परमं धनं”। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा —

“जिमि सरिता सागर मह जाई, यद्यपि ताहि कामना नाही।”

अर्थात जिस प्रकार नदियां स्वतः सागर की ओर बहती हैं, जबकि सागर की कोई कामना नहीं होती, उसी प्रकार पात्रता होने पर सद्गुण, सुख, शांति और समृद्धि स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ कर्म त्याग नहीं है। मनुष्य को अपने धर्म के अनुसार निरंतर कर्म करते रहना चाहिए, फल देना ईश्वर के हाथ में है। ईश्वर कब, क्या, कितना और कैसे देना है, यह हमसे बेहतर जानता है। इसलिए धैर्य, कृतज्ञता और संतोष के साथ कर्म करते रहना ही जीवन का श्रेष्ठ मार्ग है।

कथा के अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, साध्वी मां देवेश्वरी, भाजपा महानगर मंत्री  पूनम ममगाईं,  अंजू ध्यानी, रमाबल्लभ भट्ट, स्वामी दर्शन भारती, पूर्व राज्यमंत्री डी.एस. रावत सहित बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Naveen Joshi

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