देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जेनी प्रकरण एक बार फिर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। शनिवार को देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेनी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर वर्ष 2003 में दुष्कर्म किए जाने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने और अपने बेटे का दोबारा डीएनए परीक्षण कराने की मांग की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेनी ने दावा किया कि घटना के समय उनकी उम्र 16 वर्ष थी। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब डेढ़ से दो महीने तक उन्हें अलग-अलग स्थानों और होटलों में ले जाकर उनके साथ जबरदस्ती की गई। जेनी के मुताबिक, गर्भवती होने के बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रखा गया।
जेनी ने मामले की पूर्व में हुई जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बेटे के डीएनए परीक्षण को लेकर उन्हें संदेह है। उनका दावा है कि जांच के दौरान उनके बेटे का सैंपल लिया ही नहीं गया था। उन्होंने मांग की कि उनके बेटे का दोबारा डीएनए टेस्ट कराया जाए, ताकि उसके जैविक पिता की पहचान स्पष्ट हो सके और उसे पिता का नाम मिल सके।
इस दौरान जेनी ने मामले में पूर्व में उनकी पैरवी करने वाले अधिवक्ता शिवचरण सिंह रावत की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अधिवक्ता की गिरफ्तारी की मांग करते हुए दावा किया कि वर्ष 2016 में उन्होंने दिल्ली में भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया था।
गौरतलब है कि जेनी प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति में पिछले दिनों उस समय फिर से बयानबाजी तेज हो गई थी, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कांग्रेस नेताओं का जिक्र करते हुए इस मामले का उल्लेख किया था। इसके बाद पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बीच भी तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी।
वहीं, जेनी ने हाल ही में वीडियो जारी कर राजनीतिक दलों और नेताओं से उनके नाम पर राजनीति बंद करने की अपील की थी। अब प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उन्होंने एक बार फिर अपने आरोप सार्वजनिक करते हुए मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग उठाई है।
फिलहाल, जेनी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना शेष है। ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल और सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













