देहरादून में जिला प्रशासन की व्यापक आपदा मॉक ड्रिल, राहत-बचाव तंत्र की तत्परता और समन्वय का हुआ परीक्षण
देहरादून। जिले में संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन तंत्र तथा संबंधित विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय क्षमता का परीक्षण किया गया।
मॉक ड्रिल के तहत लम्बीधार–किमाड़ी मोटर मार्ग पर भारी वर्षा के कारण भूस्खलन होने से एक बस के मलबे में दबने तथा एक अन्य वाहन के करीब 35 मीटर गहरी ढलान में फिसलने का परिदृश्य तैयार किया गया। इस घटना में लगभग 20 लोगों के प्रभावित होने की सूचना मिलते ही जिला आपदा कंट्रोल रूम सक्रिय हो गया और तत्काल उपजिलाधिकारी मसूरी तथा संबंधित अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
दूसरे परिदृश्य में चकराता–त्यूनी मोटर मार्ग पर धारनाधार के समीप भारी भूस्खलन और बोल्डर गिरने से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध होने की स्थिति बनाई गई। सड़क के दोनों ओर यात्री वाहन, स्थानीय परिवहन और आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक फंस गए। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी चकराता और संबंधित विभागों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।
मॉक अभ्यास के तीसरे चरण में ऊपरी जलागम क्षेत्रों में लगातार वर्षा के कारण रिस्पना, गंगा, चन्द्रभागा, सुसवा और सोंग नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि का परिदृश्य तैयार किया गया। गौहरी माफी क्षेत्र में बाढ़ का पानी प्रवेश करने, कई सड़कें और छोटे पुल जलमग्न होने तथा अनेक परिवारों के फंसने की स्थिति दर्शाई गई। पशुधन और घरेलू संपत्तियों पर भी खतरे का आकलन किया गया।
अभ्यास के दौरान प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी, नावों और बचाव दलों की तैनाती, राहत शिविरों की स्थापना, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी जैसी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह केवल मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव एजेंसियों की तैयारी, त्वरित निर्णय क्षमता और आपसी समन्वय को परखना था।
क्या रहा मॉक ड्रिल का फोकस
लम्बीधार–किमाड़ी मार्ग पर भूस्खलन में बस दबने का अभ्यास।
चकराता–त्यूनी मार्ग पर मलबा और बोल्डर गिरने से सड़क बंद होने की स्थिति।
नदियों के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ और जलभराव का परिदृश्य।
राहत-बचाव दलों, प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र की त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण।
प्रभावित लोगों की निकासी, राहत शिविर, चिकित्सा सहायता और समन्वय व्यवस्था का अभ्यास।







