देहरादून। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून द्वारा रविवार को कम्युनिटी फिटनेस एवं फेफड़ों की हेल्थ अवेयरनेस पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। रेस्पिरेटरी वेलनेस और प्रिवेंटिव केयर के प्रति जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों से 250 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में विश्व बॉक्सिंग काउंसिल चैंपियन रितेश सिंह बिष्ट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर मैक्स हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सक—डॉ. वैभव चाचरा, प्रिंसिपल कंसल्टेंट (पल्मोनोलॉजी), डॉ. विवेक कुमार वर्मा, प्रिंसिपल कंसल्टेंट (पल्मोनोलॉजी), तथा डॉ. अमित बडोला, कंसल्टेंट (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) ने फेफड़ों की सेहत को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
डॉ. वैभव चाचरा ने बढ़ते प्रदूषण, तंबाकू सेवन, संक्रमण और बदलती जीवनशैली के कारण फेफड़ों की बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूर रहना, पर्याप्त जल का सेवन, प्रदूषित क्षेत्रों में मास्क का उपयोग और हेल्थ चेकअप जैसी सरल आदतें फेफड़ों को स्वस्थ रखने में बेहद सहायक हैं।
डॉ. विवेक कुमार वर्मा ने कहा कि “फेफड़ों की अधिकतर समस्याएँ शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार से बेहतर तरीके से नियंत्रित की जा सकती हैं। इस तरह की सामुदायिक जागरूकता गतिविधियाँ लोगों को फेफड़ों की सेहत के प्रति सजग बनाती हैं।”
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अमित बडोला ने बताया कि लंग कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे मुख्य वजह शुरुआती लक्षणों की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में स्क्रीनिंग और जांच से परिणामों में काफी सुधार किया जा सकता है, विशेष रूप से स्मोकिंग करने वालों और उच्च जोखिम वाले समूहों में। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक टारगेटेड थेरेपी से अब कई मामलों में कीमोथेरेपी की आवश्यकता कम हो गई है, जिससे बेहतर और कम साइड इफेक्ट वाले परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
कार्यक्रम में फेफड़ों को मज़बूत करने के लिए विशेष एक्सरसाइज सेशन आयोजित किया गया। साथ ही क्विज़ और रैपिड-फायर राउंड के माध्यम से प्रतिभागियों को सरल और महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं। योगिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर आधारित सत्र ने प्रतिभागियों को फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और मानसिक शांति प्राप्त करने के सरल उपाय बताए।
मैक्स हॉस्पिटल ने इस अवसर पर कहा कि फेफड़ों की देखभाल केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना इसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे कार्यक्रम समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
