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चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन हेतु नई SOP लागू

By: Naveen Joshi

On: Thursday, May 28, 2026 9:49 AM

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केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंट साहिब और आदि कैलाश यात्रा में पशु संचालन के लिए सख्त नियम लागू

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पशुओं के कल्याण को ध्यान में रखते हुए घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंट साहिब और आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर सीमित संख्या में ही अश्ववंशीय पशुओं का संचालन किया जाएगा।

सरकार द्वारा यात्रा मार्गों की वहन क्षमता निर्धारित कर दी गई है। इसके अनुसार केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000, हेमकुंट साहिब में 1050 तथा यमुनोत्री धाम में 595 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी। निर्धारित संख्या से अधिक पशुओं को मार्ग पर संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नई SOP के तहत सभी घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य कर दिया गया है। अपंजीकृत पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी भी पशु को यात्रा मार्ग पर नहीं चलाया जाएगा।

सरकार ने पशु क्रूरता के मामलों पर भी कड़ा रुख अपनाया है। बीमार, घायल या अधिक भार ढोने वाले पशुओं से कार्य लेने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्त करने, ब्लैकलिस्ट करने और एफआईआर दर्ज करने तक की कार्रवाई की जाएगी।

नई व्यवस्था के अनुसार सूर्यास्त के बाद तथा खराब मौसम की स्थिति में घोड़ा-खच्चरों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यात्रा मार्गों पर पशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 24×7 पशु चिकित्सालय, हेल्पलाइन और विशेष “म्यूल टास्क फोर्स” भी तैनात की जाएगी।

सरकार का कहना है कि यह कदम श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पशुओं के संरक्षण और मानवीय व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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