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एक छत के नीचे सुकून, भरोसा और नई ज़िंदगी – नारी निकेतन की बदली तस्वीर

By: Naveen Joshi

On: Wednesday, January 21, 2026 6:50 PM

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देहरादून,  केदारपुरम में राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन आज केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि टूटे विश्वासों को संजोने और बिखरी ज़िंदगियों को नई दिशा देने का सशक्त उदाहरण बन चुका है। बाहर से साधारण दिखने वाला यह परिसर भीतर से संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों और मानवीय सरोकारों की जीवंत मिसाल है।

यहाँ निवासरत प्रत्येक महिला और बच्चा अपने भीतर संघर्ष की कहानी समेटे हुए है, लेकिन अब उन कहानियों में पीड़ा के साथ-साथ आत्मविश्वास और नई शुरुआत की उम्मीद भी जुड़ चुकी है। परित्यक्त, बेसहारा एवं शोषित महिलाओं तथा अनाथ बच्चों को यहाँ सुरक्षित आश्रय के साथ सम्मान, देखभाल और संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।

माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा एवं देहरादून जिला प्रशासन के संकल्प से निकेतन की व्यवस्थाओं को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। बालिकाओं और शिशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, समयबद्ध उपचार, स्वच्छ वातावरण और स्नेहपूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।

जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का अतिरिक्त दो-मंजिला भवन लगभग पूर्ण हो चुका है। यह भवन उन महिलाओं के लिए सम्मानजनक आश्रय प्रदान करेगा, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेली रह गई हैं। निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि कोई भी महिला या बच्चा स्वयं को असुरक्षित या उपेक्षित महसूस न करे।

जिला योजना एवं खनिज न्यास मद से बजट उपलब्ध कराते हुए सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवास, स्वच्छता एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में नारी निकेतन में 178 बेसहारा महिलाएँ, बालिका निकेतन में 21 बालिकाएँ तथा बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे निवासरत हैं।

बालक-बालिका निकेतन में बच्चों को नियमित शिक्षा के साथ-साथ कम्प्यूटर शिक्षा दी जा रही है। वहीं महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई-बुनाई, क्राफ्ट डिज़ाइन जैसे आजीविकोपार्जन से जुड़े प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। मानसिक एवं शारीरिक सशक्तिकरण हेतु योग, संगीत और वाद्य यंत्र प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई है।

बालिका निकेतन में खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहाँ बालिकाएँ खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन एवं योग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सुरक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने हेतु दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो नर्सों की तैनाती तथा चिकित्सकों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।

इसके अतिरिक्त शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, लॉन्ड्री रूम, रसोई, जिम क्षेत्र, छत मरम्मत, इन्वर्टर स्थापना, अलमारी, रजाइयों एवं बेड की व्यवस्था सहित अनेक विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं।

दिसंबर माह में जिलाधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान दिए गए आश्वासन आज धरातल पर साकार होते दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन की संवेदनशीलता से योजनाएँ काग़ज़ से निकलकर ज़िंदगियों को संवार रही हैं। केदारपुरम स्थित यह निकेतन अब केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि उम्मीद, सम्मान और नई शुरुआत की कहानी बन चुका है।

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