देहरादून, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ महानगर दक्षिण के महाराणा प्रताप नगर स्थित चंद्रमणि बस्ती में हुआ। इस अवसर पर आयोजित पूर्ण गणेश मे कार्यक्रम में 130 स्वयंसेवकों ने योग, व्यायाम और अनुशासन का अनुकरणीय प्रदर्शन कर उपस्थित जनमानस को प्रेरित किया। कार्यक्रम में मातृशक्ति, युवा वर्ग एवं स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसने आयोजन को जन-उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। मुख्य वक्ता डॉ. शैलेंद्र (उत्तराखंड प्रांत प्रचारक) ने विजयदशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक मात्र नहीं है, बल्कि सत्य, धर्म और संगठन की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने पूजनीय डॉ. हेडगेवार की दूरदृष्टि का स्मरण कर कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय संघ की स्थापना ने समाज को आत्मविश्वास, संगठन और स्वाभिमान से जोड़ा, जिसकी शताब्दी यात्रा आज प्रेरणादायी गाथा के रूप में खड़ी है। वक्ता ने शस्त्र पूजन एवं शक्ति उपासना की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठित समाज ही अन्याय और अराजकता फैलाने वाली शक्तियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की कथा का उदाहरण देते हुए उन्होंने आत्मबल और संगठन की शक्ति से हर चुनौती का सामना करने का संदेश दिया।इस अवसर पर उन्होंने संघ के विभिन्न आयामों – सेवा, अनुशासन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता – पर विशेष बल दिया। साथ ही समाज को धर्मांतरण और विघटनकारी षड्यंत्रों से सावधान रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वंचित व उपेक्षित वर्गों की सेवा ही सच्चे राष्ट्रधर्म का पालन है। लगातार हो रही झमाझम बारिश के बीच भी स्वयंसेवकों का उत्साह, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति अनुकरणीय रही। वक्ता ने कहा कि महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलकर ही भारत माता को विश्वगुरु और शांति का प्रतीक बनाया जा सकता है। संघ द्वारा समय-समय पर युद्धकाल, आपदा और दुर्घटनाओं में किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्कार शाखा और संगठन से ही प्राप्त होते हैं। समारोह की अध्यक्षता भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. गोविंद सागर भारद्वाज (IFS) ने की। कार्यक्रम में देवराज सहित अनेक कार्यकर्ता एवं समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति रही।
