लापरवाही पर आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और त्वरित राहत व्यवस्था के निर्देश
देहरादून,। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कोषागार सभागार में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने, नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने तथा किसी भी आपदा की सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में पौधरोपण भी किया।
समीक्षा बैठक में लोक निर्माण, सिंचाई, जल संस्थान, ऊर्जा निगम, स्वास्थ्य, पुलिस, नगर निगम, वन विभाग, ग्रामीण विकास, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सहित विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर निगरानी बढ़ाई गई है तथा आवश्यक मशीनरी, मानव संसाधन और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
विनय रुहेला ने कहा कि मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों तथा संपर्क मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों को जेसीबी, पोकलेन सहित आवश्यक मशीनरी रणनीतिक स्थानों पर पहले से तैनात रखने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग को नदियों के जलस्तर और तटबंधों की नियमित निगरानी करने, जबकि नगर निकायों को जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा।
स्वास्थ्य विभाग को संभावित आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दवाएं, एंबुलेंस, मेडिकल टीम और उपकरण उपलब्ध रखने के साथ ही डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम के प्रभावी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए। पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों को समन्वित कार्ययोजना के साथ त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैयार रहने को कहा गया।
उपाध्यक्ष ने सभी विभागों को माइक्रो प्लान तैयार करने, जिम्मेदार अधिकारियों की सूची, संसाधनों और प्रतिक्रिया समय को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजी तैयारियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अधिकारियों को नियमित फील्ड निरीक्षण कर समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि आपदा प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
उन्होंने पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, एनएच, एनएचएआई और पीएमजीएसवाई को सड़कों के गड्ढे भरने, बंद मार्गों को शीघ्र खोलने, निर्माणाधीन सड़कों के मलबे का नियमानुसार निस्तारण करने तथा वन विभाग को सड़कों के किनारे झुके और गिरे पेड़ों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। विद्युत विभाग को जर्जर पोल, ट्रांसफार्मर और झूलती बिजली लाइनों को समय रहते दुरुस्त करने तथा जल संस्थान एवं पेयजल निगम को पेयजल आपूर्ति सुचारु रखने और क्षतिग्रस्त लाइनों की शीघ्र मरम्मत करने को कहा गया।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिले की आपदा तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में 66 जेसीबी तैनात की गई हैं। उन्होंने ड्रेनेज कार्य, नदी चैनलाइजेशन, पुलों की सुरक्षा तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों का भी विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया और सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी नीजर शर्मा, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।









