देहरादून,। ब्रह्मोस के पूर्व सीईओ एवं एमडी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि अंतरिक्ष की अनंत संभावनाओं को साकार करने के लिए परंपरागत सोच से आगे बढ़कर कल्पनाओं को नवाचार से जोड़ना होगा। ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोच ही उन नई उड़ानों का आधार है, जो मानवता को अंतरिक्ष की अगली सीमा तक ले जाएंगी।
वह ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। डॉ. मिश्रा ने रक्षा प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रॉकेट टेक्नोलॉजी के इतिहास से लेकर भारत में स्वदेशी रॉकेट तकनीक के विकास तक की यात्रा साझा की।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच, निरंतर अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता ने भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज अत्याधुनिक रक्षा तकनीक केवल सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की तकनीकी क्षमता का प्रतीक भी है।
विमान की उड़ान के वैज्ञानिक सिद्धांत समझाए
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. संजय मित्तल ने छात्र-छात्राओं को विमान की दुनिया के वैज्ञानिक सिद्धांतों से रूबरू कराया। उन्होंने विमान के विकास और उड़ान के इतिहास से शुरुआत करते हुए विभिन्न प्रकार के विमानों तथा उनके डिजाइन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विमान की संरचना और उसके प्रत्येक हिस्से की भूमिका समझाते हुए उड़ान गतिकी के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी। डॉ. मित्तल ने स्ट्रीमलाइन बॉडी और ब्लफ बॉडी के उदाहरणों के माध्यम से बताया कि वायुप्रवाह को नियंत्रित करने वाली संरचना विमान की गति, स्थिरता और दक्षता को किस प्रकार प्रभावित करती है।
कई संस्थाओं ने संयुक्त रूप से किया आयोजन
विशेष सत्र का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, एनईपी सारथी, टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (टीबीआई), बीआईएस, इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल और ऑर्बिट क्वेस्ट क्लब ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह, प्रो. वीसी डॉ. संतोष एस. सर्राफ, विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर जोशी, टीबीआई की सीईओ सरिस्मा डांगी सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।













