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देश को मिले 109 नए वन अधिकारी, 21वीं सदी का सबसे बड़ा IFS बैच

By: Naveen Joshi

On: Thursday, July 31, 2025 6:47 AM

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देहरादून,  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय वन सेवा 2023-25 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह आज वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में संपन्न हुआ। यह 21वीं सदी का अब तक का सबसे बड़ा बैच है, जिसमें 109 भारतीय परिवीक्षार्थी अधिकारियों के साथ भूटान के 2 विदेशी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूर्ण किया।

समारोह के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्‍यन, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रमाण पत्र और पदक प्रदान किए और अपने प्रेरणादायी दीक्षांत भाषण में सेवाकाल में ईमानदारी, करुणा और अनुशासन का पालन करने की सीख दी। उन्होंने कहा, “आपको अपने दायित्वों के प्रति सजग रहना होगा और ऐसा कार्य करना होगा जिससे सेवा-समाप्ति पर आपको सच्ची संतुष्टि और ‘सेंस ऑफ फुलफिलमेंट’ का अनुभव हो।”

अकादमी के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा ने निदेशक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि अब तक 14 मित्र राष्ट्रों सहित भारत के सैकड़ों वन अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस बैच में 22 महिला अधिकारी भी शामिल हैं तथा 50 अधिकारियों को ऑनर्स डिप्लोमा प्रदान किया गया है। 2023 में पाठ्यक्रम के नये स्वरूप के तहत पासआउट होने वाला यह पहला बैच है।

बैच टॉपर श्री मिधुनमोहन एस.बी. (केरल संवर्ग) रहे। समारोह में विभिन्न उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्‍यन ने अधिकारियों को नियमों का पालन करने की सख्त सलाह दी और कहा कि “छोटा-सा गलत निर्णय भी भविष्य को प्रभावित कर सकता है। सदैव सकारात्मक और विनम्र बने रहें।” उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद का उद्धरण “सत्यं वद, धर्मं चर” देते हुए सत्य और धर्म के पथ पर चलने का संदेश दिया।

इस गरिमामयी अवसर पर वन विभाग एवं पर्यावरण क्षेत्र के अनेक शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें उत्तराखंड के पीसीसीएफ (एचओएफएफ), महानिदेशक आईसीएफआरई, एफआरआई निदेशक, वानिकी शिक्षा निदेशालय के निदेशक, केंद्रीय राज्‍य वन सेवा अकादमी, आईजीएनएफए एवं अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि, प्रशिक्षु अधिकारियों के परिजन एवं अतिथि शामिल थे।

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