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द नोमैड्स लैंड: वन गुज्जर्स – हिमालय की गोद में खेलती खानाबदोश सांसें

By: prabhatchingari

On: Wednesday, March 6, 2024 9:47 PM

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देहरादून,द नोमैड्स लैंड: वन गुज्जर्स, दूरदर्शी फिल्ममेकर भारतबाला द्वारा रचित एक ऐसी विलक्षण कृति है जो हमें हिमालय के हृदय की गहराइयों में ले जाती है। पर्वत की इन वादियों में वन गुज्जर समुदाय की अनूठी गाथा उजागर होती है, एक ऐसी कहानी, जो मनुष्य, पशु और प्रकृति के मध्य सह-अस्तित्व की सदियों पुरानी भाषा बोलती है। यह भाषा, जिसे वन गुज्जर समाज न केवल समझता है, बल्कि जीता भी है, सदियों से उनके जीवन का आधार बनी हुई है।
द नोमैड्स लैंड: वन गुज्जर्स उत्तराखंड सीरीज़ की नवीनतम रिलीज़ है, जो रूरल इंडिया सपोर्टिंग ट्रस्ट (आरआईएसटी) के साथ साझेदारी में एक वर्चुअल भारत प्रोडक्शन है। इन फिल्मों में उत्तराखंड की विशिष्ट विषयवस्तु, पहल और सांस्कृतिक प्रथाओं का अध्ययन अंतर्निहित किया गया है।
स्वयं को वर्चुअल भारत के इस अलौकिक कथानक में सराबोर हो जाने दें , एक रचनात्मक अभयारण्य में जहां कलात्मकता अपने उच्चतम शिखर पर स्थित है। यह एक मनमोहक कथा है जो मनुष्य, जानवर और प्रकृति के बीच अविरत सहज अस्तित्व को अनावृत करती है, जिसका प्रतिनिधित्व वन गुज्जर करते हैं। ।
बदलते क्षितिजों की गाथा
हिमालय के आसमान के नीचे एक पेड़ पर बैठा हुआ युवक वन गुज्जर जीवन का चित्रण करता है – कोई स्थायी आवास नहीं, कोई संपत्ति नहीं, सदा चलायमान रहना, प्रकृति के साथ पूर्ण समन्वय में जीना। वन गुज्जर वस्तुतः घुमंतू होते हैं, पशुपालन के माध्यम से स्वयं को जीवित रखते हुए यह मुस्लिम शाकाहारी गर्मियों को पहाड़ों में और सर्दियों को मैदानों में बिताते हैं। उनकी अद्वितीय परंपरा वर्षों से चलती आ रही है, जो मनुष्य, जानवर और प्रकृति के बीच सूक्ष्म संतुलन का उदाहरण है। वन गुज्जर सिर्फ उतना ग्रहण करते हैं जितना उन्हें जीवित रहने के लिए चाहिए, और वे उन वनों को संरक्षित रखते हैं जिन्हे वे घर कहते हैं। प्रेम और राजशाही की किंवदंतियाँ और गीत उनके समृद्ध इतिहास में परतें जोड़ते हैं। आज, वन रक्षा कानून और परमिट उनकी जीवन शैली को चुनौती देते हैं, परन्तु उनका प्रकृति के साथ लंबे समय से चलता आ रहा संबंध जीवित है।
द नोमैड्स लैंड: वन गुज्जर्स इन पहाड़ी घुमंतुओं की अविजित आत्मा को नमन है, पहाड़ों की दीर्घजीवी धरोहर का साक्षी है, और सह-अस्तित्व की उनकी सामंजस्यपूर्ण भाषा का उत्सव है। बढ़ते प्रतिबंधात्मक कानूनों का सामना करते हुए, उनका अस्तित्व जंगल में व्याप्त है, जहां वे एक अभिन्न, रहस्यमयी उपस्थिति हैं।
हमारे साथ आरूढ़ हों इस कलात्मक यात्रा पर
वर्चुअल भारत चैनल पर इस कलात्मक यात्रा पर आरूढ़ हों । वन गुज्जरों के मंत्रमुग्ध कर देने वाले उत्साह, अविचलित स्थिरता और असीम जीवनशक्ति का अनुभव करें, और इस अनुभव को, इस कथा को आत्मसात कर लें, जो घर, स्थायित्व और अपनेपन की हमारी अवधारणा को चुनौती देती है।
रूरल इंडिया सपोर्टिंग ट्रस्ट (आरआईएसटी) के बारे मेंः
इस ट्रस्ट की स्थापना 2007 में हुई। उसके बाद से ही ट्रस्ट समानता के मूल सिद्धांतों के प्रति पूर्ण रूप से कटिबद्ध है। दृढ़ता से इस बात का पुरजोर समर्थन करता है कि उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुँच एक सार्वभौमिक अधिकार है। वह ऐसे भारत की कल्पना करता है, जिसमें शारीरिक औसर मानसिक कल्याण के अवसर सबको समान रूप से मिलें। ट्रस्ट सक्रिय रूप से समान विचारों वाले संगठनों के साथ सहयोग करता है। संगठन का मिशन गरीबी को कम करने के लिए प्रभावशाली साझेदारियां बनाना है। साथ ही वह सामाजिक विषमताओं को हल करने के लिए समर्पित संगठनों को अनुदान देने के प्रयास भी करता है। युवाओं को शामिल करने, शिक्षित और मनोरंजन करने पर विशेष ध्यान देता है। ट्रस्ट का उद्देश्य हाशिए पर रह रहे समुदायों की मानवीय कहानियों को कलात्मक रूप से सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करना है। वह ज्ञान, सशक्तीकरण, आजीविका उन्नयन और महिला सशक्तीकरण के प्रयासों का समर्थन करता है। इसके बारे में ज़्यादा जानकारी www.ristrust.org पर प्राप्त की जा सकती है।

वर्चुअल भारत के बारे मेंः
वर्चुअल भारत 1000 फिल्मों के निर्माण की यात्रा है। जो भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यता में कला, संस्कृति, वास्तु, संगीत, लोक कथाओं और परंपराओं की अनदेखी, अनकही कहानियों को सिनेमाई कैनवास पर उतारती है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा वृहद् डिजिटल संकलन उपलब्ध करवाने का है जो मानवीय पहलुओं परआधारित होगा। युवाओं के मन मस्तिष्क को समसामयिक, अनुभवों पर आधारित कंटेंट के ज़रिए जोड़ता है, शिक्षित करता है और युवा मस्तिष्कों को मनोरंजन करता है। इस तरह वर्चुअल भारत देश की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करता है, उसे ऊपर उठाता है और निर्माण करता है। इसके बारे में ज़्यादा जानकारी www.virtualbharat.com पर प्राप्त की जा सकती है।

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