लतिका फाउंडेशन में सुचित्रा शेनॉय की पुस्तक के अंशों को सुनकर श्रोता हुए भावुक
देहरादून, वसंत विहार स्थित लतिका फाउंडेशन में आज शाम आयोजित “An Evening with Moy Moy’s Circle” कार्यक्रम प्रेम, साहस और मानवीय संवेदनाओं की एक प्रेरक मिसाल बन गया। लेखिका सुचित्रा शेनॉय द्वारा उनकी चर्चित पुस्तक “Moy Moy’s Circle: A True Story of Love, Disability and the World we can Build Together” से पढ़े गए अंशों ने श्रोताओं को भावनाओं से भर दिया। विशेषकर दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों की आंखों में नई उम्मीद और हौसले की चमक साफ दिखाई दी। यह आयोजन केवल एक पुस्तक पाठ नहीं, बल्कि उस असाधारण जीवन का उत्सव था, जिसने ‘लतिका’ जैसी संस्था को जन्म दिया। इस अवसर पर दिव्यांग बच्चों के साथ उनके 120 से अधिक अभिभावक मौजूद रहे। कार्यक्रम में लतिका फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक जो चोपड़ा मैकगोवन, ममता गोविल, सुमिता नंदा, डॉ. आरती, ओजस्विता, संजय सिंह, गरिमा सेन सहित शहर की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत की।
अभिभावकों के लिए प्रेरणा बनी ‘मॉय मॉय’ की कहानी कार्यक्रम के दौरान कई अभिभावकों ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि मॉय मॉय की कहानी ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं। एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा, “यह कहानी सुनकर हमें नई हिम्मत मिली है। यह जानना कि किसी ने इसी राह पर चलकर बदलाव लाया, हमें अपने बच्चों के भविष्य के लिए और मजबूत बनाता है।”
लेखिका का संदेश: “हम सब एक सर्किल का हिस्सा हैं”सुचित्रा शेनॉय ने अपनी पुस्तक के अंशों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करते हुए कहा, “मॉय मॉय की विरासत प्रेम, देखभाल और करुणा की है। इस शाम का उद्देश्य यही संदेश देना है कि हर परिवार के चारों ओर एक ‘सर्किल’ यानी सहारा देने वाला समुदाय मौजूद है।”
उन्होंने बताया कि इस पुस्तक की सराहना राजमोहन गांधी और रामचंद्र गुहा जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों ने की है। पुस्तक की बिक्री से प्राप्त होने वाली संपूर्ण राशि लतिका फाउंडेशन के कार्यों को समर्पित की जाएगी, ताकि मॉय मॉय का सपना आगे बढ़ता रहे।
लतिका फाउंडेशन: एक सपने की साकार मिसाल करीब 30 वर्ष पहले केवल तीन बच्चों से शुरू हुई लतिका फाउंडेशन आज हजारों बच्चों और परिवारों के जीवन में उम्मीद की किरण बन चुकी है। संस्था विकासात्मक दिव्यांगता वाले बच्चों को उच्च-गुणवत्ता की शिक्षा, देखभाल, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कानूनी सहायता प्रदान कर रही है।
यह शाम इस बात का प्रतीक बनी कि एक सच्ची कहानी कैसे दिलों को जोड़ सकती है, आंखों के आंसुओं को मुस्कान में बदल सकती है और समाज को अधिक दयालु एवं संवेदनशील दिशा में आगे बढ़ा सकती है।
