*देहरादून :* सुभाष नगर के सेठ पन्नालाल ग्राउंड में इन दिनों भक्ति का सागर उमड़ रहा है। श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन, गुरुवार 1 मई 2025 को एक अद्भुत और अविस्मरणीय दृश्य देखने को मिला। आचार्य पवन नंदन महाराज जी की अमृतवाणी के सानिध्य में, श्रद्धालुओं ने एक ही मंच पर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव, श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव और भगवान नृसिंह के अवतार की दिव्य लीलाओं का धूमधाम से आनंद लिया।
यह आध्यात्मिक संगम अपने आप में अनूठा रहा, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम राम की जन्म की खुशियाँ, नटखट कन्हैया के आगमन का उल्लास और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे से प्रकट हुए नृसिंह भगवान की शक्ति और करुणा का एक साथ अनुभव किया गया। पूरा पंडाल भक्तिमय संगीत और जयकारों से गूंज उठा, मानो स्वयं देवलोक पृथ्वी पर उतर आया हो।
इस पवित्र अवसर पर समिति के कई प्रमुख सदस्य, जिनमें कार्यकारी अध्यक्ष विनोद राई, महासचिव नवीन जोशी, उपाध्यक्ष अभिषेक परमार, कोषाध्यक्ष श्री के. एन. लोहनी और मीडिया प्रभारी गणेश विधायक धनोल्टी प्रीतम पवार पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ,पूर्व मेहर सुनील उनियाल गामा, पूर्व पार्षद सुनील कुमार,प्रमुख थे, उपस्थित रहे। मालती राई, प्रमिला नेगी, सूमीत मेहता, कादंबरी शर्मा, तारा राई, ममता राई, रेखा यादव, दीपक गोसाई, धन सिंह फर्त्याल, और प्रदीप राई जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति से इस आयोजन की शोभा बढ़ाई।
सबसे खास बात यह रही कि इस त्रिवेणी महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। हर आयु वर्ग के लोग भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। बच्चों में श्रीकृष्ण और राम के बाल स्वरूप की झाँकियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, वहीं युवा और बुजुर्ग नृसिंह भगवान की पराक्रम गाथा सुनकर रोमांचित हो उठे।
आचार्य पवन नंदन महाराज जी ने अपने प्रवचन में इन तीनों अवतारों के महत्व और उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के ये विभिन्न रूप हमें धर्म, न्याय और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस कलयुग में भागवत कथा सुनना और भगवान के इन पावन चरित्रों का स्मरण करना मनुष्य के जीवन को सार्थक बना सकता है।
समिति के सदस्यों ने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन और प्रसाद की व्यवस्था सुनिश्चित की। इस अनूठे आध्यात्मिक अनुभव ने निश्चित रूप से सभी के हृदय में भक्ति की एक गहरी छाप छोड़ी। यह पहला अवसर था जब सुभाष नगर में एक ही दिन में तीन प्रमुख आराध्य देवों के जन्मोत्सव को इतने भव्य रूप से मनाया गया, जिससे यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों के लिए एक यादगार घटना बन गया।
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