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UPES ने राष्ट्रीय स्तर की स्टार्ट-अप प्रतियोगिता में स्कूली इनोवेटर्स का किया सम्मान

 

 

देहरादून,  UPES ने अपने रनवे इनक्यूबेटर के माध्यम से आयोजित दो दिवसीय फ्यूचर फ़ाउंडर्स चैलेंज (FFC) 2025 का भव्य समापन किया। 17–18 नवंबर को आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर की स्टार्ट-अप प्रतियोगिता में देश के शीर्ष 30 स्कूलों के 1200 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इनमें से 500 से अधिक प्रविष्टियों में से 90+ छात्र फाइनल राउंड में पहुँचे।

 

कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य उन्हें वास्तविक उद्यमिता का अनुभव प्रदान करना था। दो दिनों तक चले सत्रों में छात्रों ने विचार निर्माण, बिजनेस मॉडलिंग और पेशेवर पिचिंग की प्रक्रियाओं को समझा। कीनोट सत्रों, कार्यशालाओं और कई पिचिंग राउंड्स के माध्यम से प्रतिभागियों की नवाचार क्षमता, प्रस्तुति कौशल और समस्या-समाधान सोच का आकलन किया गया।

 

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में देश के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम से प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे—सिद्धार्थ डागा (संस्थापक, NeoMotion), सौरभ जैन (संस्थापक, Fun2Do Labs; एडवाइज़र–Paytm), डॉ. विक्रम वेंकटेश्वरन (हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंसेज़ विशेषज्ञ) और जीत विजय (पूर्व CEO, MeitY Startup Division)।

 

पहले दिन यूनिट इकनॉमिक्स और प्रभावी पिचिंग पर हुई कार्यशालाएँ विशेष आकर्षण रहीं, जिन्हें रनवे इनक्यूबेटर के CEO प्रो. राहुल नैणवाल और स्टार्ट-अप मेंटर जीत विजय ने संचालित किया। इसके बाद चयनित टीमों ने तीन अलग-अलग ट्रैक्स में अपनी प्रारंभिक प्रस्तुतियाँ दीं।

 

अंतिम दिन शीर्ष 10 टीमें MAC सभागार में ग्रैंड फिनाले के लिए उतरीं। प्रस्तुत नवाचारों में भोपाल के सागर पब्लिक स्कूल द्वारा विकसित स्मार्ट क्रचेज़, APS धौला कुआँ (दिल्ली) की छात्रा द्वारा साइन लैंग्वेज को भारतीय भाषाओं के टेक्स्ट में बदलने वाली रोबोटिक ग्लव, DPS जबलपुर की टीम द्वारा दृष्टिबाधितों के लिए AI-सक्षम स्मार्ट ग्लासेज़, तथा वेंदकेश्वर इंटरनेशनल स्कूल (द्वारका) की टीम द्वारा सतत बायोफ्यूल जनरेशन सिस्टम प्रमुख रहे।

 

प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता टीम को ₹1,00,000, प्रथम उपविजेता को ₹50,000 और द्वितीय उपविजेता को ₹25,000 का पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं चौथे, पाँचवें और छठे स्थान पर आने वाली टीमों को क्रमशः ₹15,000, ₹10,000 और ₹7,500 दिए गए। चयनित टीमों को UPES रनवे इनक्यूबेटर द्वारा आगे मेंटरशिप और संभावित इनक्यूबेशन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

 

कार्यक्रम के समापन पर UPES के कुलपति डॉ. राम शर्मा ने कहा,

“उद्यमिता किसी यूनिकॉर्न की खोज का नाम नहीं, बल्कि दुनिया को पैनी नज़र से देखने की कला है। यदि कोई वास्तविक समस्या पहचानकर उसका समाधान बड़े पैमाने पर लागू कर सके, तो वही एक सार्थक उद्यम है। UPES में हमारे छात्र रक्षा तकनीक से लेकर AI-आधारित प्लेटफ़ॉर्म तक पर काम कर रहे हैं, जिनमें से कई को सरकारी अनुदान भी मिला है। फ्यूचर फ़ाउंडर्स चैलेंज छात्रों को यह विश्वास दिलाने की पहल है कि बड़े समाधान छोटे विचारों से ही जन्म लेते हैं, और एक स्कूल छात्र भी भविष्य बदलने वाले आइडिया दे सकता है।”

 

 

 

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