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रेड अलर्ट के बीच उत्तराखंड हाई अलर्ट पर, 24×7 निगरानी के आदेश

By: Naveen Joshi

On: Thursday, July 9, 2026 5:40 PM

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय, चारधाम यात्रा, ग्रामीण सड़कें और नदी-नालों पर विशेष निगरानी

 

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और आगामी दिनों के लिए जारी भारी वर्षा के अलर्ट ने शासन-प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने प्रदेशभर में आपदा की स्थिति की व्यापक समीक्षा करते हुए सभी विभागों को 24×7 सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट कहा कि जन-जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम विभाग द्वारा 10 जुलाई के लिए नैनीताल, ऊधमसिंहनगर और चम्पावत में रेड अलर्ट, जबकि देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद सभी जिलाधिकारियों, पुलिस, एसडीआरएफ, लोक निर्माण, पेयजल, विद्युत और स्वास्थ्य विभागों को पूर्ण सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

चारधाम यात्रा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। खराब मौसम अथवा भारी वर्षा के दौरान यात्रियों को सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट्स पर रोका जाएगा, जहां भोजन, पेयजल, दवाइयों, बच्चों के लिए दूध, शौचालय और आवास जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

समीक्षा बैठक में नदी-नालों, गाड़-गदेरों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों से परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्माण कार्य स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जरूरत पड़ने पर कार्य अस्थायी रूप से रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

बारिश और भूस्खलन से बाधित सड़क संपर्क बहाल करने के लिए लोक निर्माण विभाग को युद्धस्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने तथा संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलेन मशीनें, आवश्यक उपकरण और मानवबल की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

सचिव आपदा प्रबंधन ने प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनियों का गंभीरता से पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें। उन्होंने लोगों से केवल शासन और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया।

 

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