देहरादून,भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में नदियों को केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी शक्ति माना गया है। इन्हीं पवित्र नदियों में यमुना मैया का विशेष स्थान है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में यमुना को पापनाशिनी, मोक्षदायिनी और भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय नदी के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि यमुना के जल में स्नान, आचमन और स्मरण मात्र से मनुष्य के जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
स्कंद पुराण में वर्णन मिलता है कि गंगा और गया की तरह यमुना तीर्थ भी महापापों का नाश करने वाला है। इसके पवित्र जल में स्नान करने से मनुष्य के सभी कष्ट, दुख और अज्ञान दूर हो जाते हैं। श्रद्धालु यमुना मैया को जीवन की शुद्धि और आत्मा की मुक्ति का माध्यम मानते हैं।
पद्म पुराण में नारद मुनि ने यमुना स्नान की महिमा का विस्तार से वर्णन किया है। कहा गया है कि सत्य युग में तपस्या, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलयुग में दान से जो पुण्य प्राप्त होता है, उससे अधिक पुण्य यमुना में एक बार श्रद्धा से स्नान करने से मिल जाता है। मान्यता है कि यमुना जल का आचमन करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और उन्हें स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है। साथ ही कुरुक्षेत्र, पुष्कर और काशी जैसे महान तीर्थों के समान पुण्य यमुना स्नान से सहज ही प्राप्त हो जाता है।
वराह पुराण में यमुना को गंगा से भी अधिक पवित्र बताया गया है। इसमें कहा गया है कि गंगा का जल जब सौ गुना अधिक पवित्र हो जाता है, तब वह यमुना कहलाता है। पुराण के अनुसार यमुना के जल में स्नान, उसका सेवन या केवल स्मरण करने से भी बड़े-बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं। सूर्यदेव की पुत्री और यमराज की बहन होने के कारण यमुना मैया के भक्तों को यमराज के भय से मुक्ति मिलती है। यह भी मान्यता है कि यमुना स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने वाला व्यक्ति परम गति अर्थात मोक्ष को प्राप्त करता है।
वामन पुराण में यमुना को कलिंद पर्वत से निकलने वाली दिव्य धारा बताया गया है। इसमें वर्णित है कि यमुना का आश्रय लेने और श्रद्धा से स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
शिव पुराण में भी यमुना स्नान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। इसमें उल्लेख है कि यमुना के जल का सेवन करने या उसमें स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयाग और अन्य संगम स्थलों की महिमा भी गंगा-यमुना के पावन तटों से जुड़ी हुई मानी गई है। पुराणों में भगवान शिव और अन्य देवताओं द्वारा यमुना मैया की स्तुति का भी उल्लेख मिलता है।
आज भी यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यमुना मैया की आराधना और उनके पावन जल का स्मरण मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, पुण्य और मोक्ष प्रदान करता है।






