देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उत्तरांचल बायो मेडिकल कॉलेज, ट्रांसपोर्ट नगर परिसर में दक्षिणी महानगर के महाराणा प्रताप नगर, सेवला बस्ती के स्वयंसेवकों का “शताब्दी शंखनाद” एकत्रीकरण कार्यक्रम भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवक एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में योग एवं आसन का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
मुख्य वक्ता संघ के महानगर प्रचारक देवराज ने विजयदशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिवस अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना भी इसी शुभ दिवस पर डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार जी द्वारा की गई थी, क्योंकि यह दिन विजय का प्रतीक माना जाता है। संघ की स्थापना को 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और अब संगठन 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
देवराज ने कहा कि इन सौ वर्षों में संघ ने देश और समाज के लिए निस्वार्थ भाव से जो कार्य किया, वह किसी प्रशंसा का नहीं, बल्कि प्रेरणा का विषय है। “हमने अब यह संकल्प लिया है कि जो कार्य अधूरे रह गए हैं, उन्हें अगले दशक में पूरा किया जाएगा,” उन्होंने कहा।
पंच परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करेगा संघ
उन्होंने बताया कि संघ अब “पंच परिवर्तन” के माध्यम से समाज जीवन में व्यापक सुधार लाने का कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत पाँच प्रमुख बिंदु— कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी आधारित जीवन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य बोध शामिल हैं।
1. कुटुंब प्रबोधन:
परिवार को समाज की सबसे छोटी लेकिन सबसे सशक्त इकाई बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ परिवार से ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। परिवार में संवाद, संस्कार और सहयोग का वातावरण बनाना आवश्यक है।
2. सामाजिक समरसता:
उन्होंने कहा कि समाज में जाति, ऊँच-नीच और भेदभाव जैसी कुरीतियों को त्यागना होगा। सभी एक हैं — इस भावना को आत्मसात कर ही समाज में वास्तविक एकता और एकात्मता स्थापित की जा सकती है।
3. स्वदेशी एवं आत्मनिर्भर जीवन:
देवराज ने कहा कि स्वभाषा, स्वभूषा, स्वसंस्कृति और स्वदेशी उद्योगों को अपनाना ही आत्मनिर्भरता की सच्ची परिभाषा है। स्थानीय व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देकर रोजगार और स्वावलंबन दोनों को बढ़ावा देना होगा।
4. पर्यावरण संरक्षण:
उन्होंने कहा कि प्रकृति पंचतत्वों पर आधारित है और इनका संतुलन बिगड़ने से आज की पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं। प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण, जल-संरक्षण और स्वच्छता जैसे कार्यों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
5. नागरिक कर्तव्य बोध:
संविधान ने हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी स्मरण कराया है। राष्ट्रभक्ति केवल अवसरों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी, ऊर्जा-संरक्षण और शिष्टाचार में भी झलकनी चाहिए।
अंत में देवराज ने कहा कि “संघ शताब्दी वर्ष उपरांत हम समाज के प्रत्येक घर तक पहुँचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 10 से 15 वर्षों में पंच परिवर्तन के माध्यम से एक सशक्त, संगठित और वैभवशाली भारत का निर्माण हमारा संकल्प है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
